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शालबनी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में रैगिंग विरोधी जागरूकता अभियान संपन्न

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। पश्चिम मिदनापुर के शालबनी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में रैगिंग के काले साए को मिटाने तथा विद्यार्थियों के मन-मस्तिष्क में जागरूकता की ज्योति प्रज्वलित करने हेतु एक प्रभावशाली “रैगिंग विरोधी जागरूकता कार्यक्रम” का आयोजन किया गया।

यह अनोखा आयोजन उस घातक प्राचीन परंपरा के विरुद्ध न केवल एक चेतावनी स्वर था, अपितु विद्यार्थियों के हृदय में एक सशक्त प्रतिज्ञा का संचार भी था कि वे इस अभिशाप से सदैव दूर रहें।

कार्यक्रम का उद्देश्य था विद्यार्थियों को रैगिंग के अभिशप्त प्रकोप से मुक्त कराना, उनके अंतर्मन में इसकी छाया को भंग करना तथा बताना कि इस काले अपराध के खिलाफ कानून की तलवार कितनी कठोर है।

कार्यक्रम में रैगिंग विरोधी पोस्टरों की प्रदर्शनी और रंगमंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से इस अभिशाप के दुष्परिणामों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे हर श्रोता के हृदय में इसकी कड़ुवाहट अंकित हो गई।

कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुए संस्थान के संस्थापक डॉक्टर असित कुमार घोष, गड़बेता रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम के सचिव महाराज, शालबनी ब्लॉक के बीडीओ रमन मंडल, शालबनी थाना के आईसी सौरभ घोष, स्थानीय विद्यालयों के प्रमुखगण एवं शालबनी के नर्सिंग, फार्मेसी तथा आईटीआई कॉलेज के प्राचार्यगण उपस्थित थे।

साथ ही, विधि और व्यवस्था की पालक शक्तियां तथा मीडिया प्रतिनिधि एवं अभिभावकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और भी बढ़ा दिया। रामकृष्ण मिशन सेवा आश्रम के सचिव महाराज द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के शुभारंभ से जैसे ज्ञान की ज्योति ने तमस का नाश किया।

शालबनी थाना के आईसी सौरभ घोष ने रैगिंग से हुई हालिया भयावह दुर्घटनाओं को जीवंत करते हुए कहा कि यह केवल परंपरा का विघातक नहीं, बल्कि कानून का उल्लंघन है, जिसके लिए कठोर दंड की व्यवस्था है।

शालबनी ब्लॉक के बीडीओ रमन मंडल ने कहा कि जब ‘स्वागत की मिठास’ रैगिंग के खतरनाक ‘कड़वे जहर’ में बदल जाती है, तब इसे सामाजिक अपराध के रूप में रोकना हमारा परम कर्तव्य बन जाता है। उपस्थित सभी विद्वान जनों ने इस जागरूकता अभियान की अनिवार्यता और आवश्यक सार्थकता को अपने विचारों से पुष्ट किया।

संस्थान के अध्यक्ष डॉक्टर असित कुमार घोष ने स्पष्ट किया कि हमारा दृढ़ संकल्प है कि हमारे विद्यालयों और कॉलेजों में रैगिंग के काले धब्बे को सदा के लिए मिटाया जाए और इसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव हेतु और अधिक सतर्कता व जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

इस प्रकार, शालबनी इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम रैगिंग के विरुद्ध एक प्रकाश स्तंभ के समान था, जो अंधकार को दूर कर नवयुवाओं को एक सुरक्षित, सम्मानजनक और सकारात्मक शिक्षा की ओर प्रेरित करता है।

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