- सवालों के घेरे में न्याय व्यवस्था, सड़क से सोशल मीडिया तक गूंजा विरोध
देहरादून/नई दिल्ली | 5 जनवरी 2026: उत्तराखंड की अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग एक बार फिर देशभर में तेज़ हो गई है। एक तरफ़ जहां लोग सड़कों पर उतरकर इंसाफ़ की गुहार लगा रहे हैं,
वहीं दूसरी ओर बलात्कार के दोषी और स्वयंभू संत गुरमीत राम रहीम सिंह को पेरोल दिए जाने की खबर ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। सोशल मीडिया से लेकर जनसभाओं तक एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या कानून सबके लिए बराबर है?
अंकिता भंडारी केस: फिर सुलगता आक्रोश
अंकिता भंडारी हत्याकांड को तीन साल से ज़्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन पीड़िता के परिवार और समाज को अब भी इंसाफ़ का इंतज़ार है। हाल के दिनों में मामले की सुनवाई और सज़ा को लेकर धीमी रफ्तार ने लोगों को फिर आंदोलित कर दिया है।

दिल्ली, देहरादून, लखनऊ, जयपुर और कोलकाता समेत कई शहरों में छात्र संगठनों, महिला समूहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक लड़की का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की परीक्षा है।
अंकिता भंडारी केस: CBI जांच की मांग, 11 जनवरी को स्टेटवाइड शटडाउन का कॉल
- 2022 में उत्तराखंड के रिसॉर्ट में 19 साल की अंकिता भंडारी की हत्या का मामला फिर सुर्खियों में है। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य (भाजपा नेता का बेटा) को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन “VIP” की संलिप्तता की अफवाहों से प्रोटेस्ट भड़क गए।
- 4 जनवरी को देहरादून, दिल्ली (जंतर-मंतर), टिहरी गढ़वाल और अल्मोड़ा में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। कांग्रेस, यूकेडी, महिला मंच और सिविल सोसाइटी ने CBI जांच की मांग की। दिल्ली में उत्तराखंड प्रवासी संगठन ने “VIP” को बेनकाब करने की मांग की।
- प्रदर्शनकारियों ने कहा: “अंकिता को न्याय मिले बिना चुप नहीं रहेंगे। सरकार सबूत मिटाने में लगी है।” 11 जनवरी को उत्तराखंड में स्टेटवाइड शटडाउन का कॉल दिया गया।
- पुलिस ने कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को रोका, जिससे तनाव बढ़ा।
राम रहीम को पेरोल, उठे तीखे सवाल
इसी बीच, दो-दो बलात्कार मामलों में सज़ायाफ्ता गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर पेरोल मिलने से आक्रोश और गहरा गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जहां एक ओर एक आम लड़की के परिवार को न्याय के लिए सालों संघर्ष करना पड़ रहा है, वहीं प्रभावशाली दोषियों को बार-बार राहत कैसे मिल जाती है।
कई महिला अधिकार संगठनों ने इसे “न्याय का दोहरा मापदंड” करार दिया है। उनका कहना है कि ऐसे फैसले समाज में गलत संदेश देते हैं और पीड़िताओं का भरोसा न्याय व्यवस्था से डगमगा जाता है।
राम रहीम 5वीं बार जेल से बाहर, विरोध में बवाल
- 4 जनवरी को हरियाणा सरकार ने राम रहीम को 40 दिनों की पैरोल दी। 2017 में रेप के दोषी राम रहीम अब तक 15 बार पैरोल/फर्लो ले चुके हैं – कुल 250+ दिन जेल से बाहर।
- सिख संगठनों और विपक्ष ने विरोध जताया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा: “रेप कन्विक्ट को पैरोल, जबकि बांदी सिंह जेल में। बेटी बचाओ का क्या हुआ?”
- राम रहीम ने पैरोल पर डेरा मुख्यालय में अनुयायियों से मुलाकात की और “सेवा” का दावा किया। लेकिन सोशल मीडिया पर #ShameOnRamRahim ट्रेंड कर रहा है।
- हरियाणा CM नायब सैनी ने कहा: “यह कोर्ट का मामला है।”
सोशल मीडिया पर गुस्सा, सरकार से जवाब की मांग
#JusticeForAnkita एक बार फिर सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। यूज़र्स सवाल कर रहे हैं कि क्या सत्ता और रसूख अपराध से बड़ी ढाल बन चुके हैं। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरते हुए पेरोल नीति और न्यायिक प्रक्रियाओं पर पारदर्शिता की मांग की है।
“यह सिर्फ अंकिता की लड़ाई नहीं”
दोनों मामलों ने महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। अंकिता केस में “VIP” को बचाने के आरोप, राम रहीम को बार-बार पैरोल – ये न्याय की साख पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं: “एक तरफ अंकिता को न्याय नहीं, दूसरी तरफ दोषी को पैरोल। यह कैसा सिस्टम है?”
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक केस तक सीमित नहीं है। यह उस सिस्टम के खिलाफ आवाज़ है, जिसमें पीड़ित को सालों इंतजार करना पड़ता है और दोषी को बार-बार राहत मिलती है।
अंकिता भंडारी के परिवार का कहना है कि जब तक दोषियों को सख्त और समयबद्ध सज़ा नहीं मिलती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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