कोलकाता हिन्दी न्यूज | 27 जुलाई 2026: पश्चिम बंगाल में अम्फान चक्रवात राहत और ‘सेबाश्रय’ परियोजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राजनीति गरमा गई है। शनिवार को विधानसभा में CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद विपक्षी खेमे से लेकर तृणमूल कांग्रेस के भीतर के राजनीतिक विरोधियों तक ने पूर्ववर्ती सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
इसी मुद्दे को लेकर रविवार को पत्रकारों से बातचीत में ‘असल’ तृणमूल कांग्रेस के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने ‘कालीघाट’ तृणमूल और सांसद अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ऋतब्रत ने दावा किया कि ‘सेबाश्रय’ शिविरों का इस्तेमाल कथित तौर पर काले धन को सफेद करने के लिए किया गया, जबकि अम्फान राहत राशि में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता हुई। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि अम्फान से जुड़ी कथित रकम विदेशों में भेजी गई। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अम्फान राहत राशि को लेकर क्या कहा गया?
2020 में कोरोना महामारी के बीच आए अम्फान चक्रवात ने पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों, खासकर सुंदरबन क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। बड़े पैमाने पर घर और बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ था।
ऋतब्रत बनर्जी का दावा है कि केंद्र की ओर से प्रत्येक क्षतिग्रस्त मकान के लिए 20 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान था, जबकि राज्य स्तर पर लाभार्थियों को कथित तौर पर केवल 5 हजार रुपये दिए गए।
इसी अंतर के आधार पर उन्होंने करीब 18 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी का दावा किया। हालांकि, इस राशि और इससे जुड़े आरोपों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना बाकी है।
ऋतब्रत ने सवाल उठाया कि केंद्र से भेजी गई राहत राशि में कथित कटौती का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
‘ज्यामितीय नेटवर्क’ का आरोप
ऋतब्रत बनर्जी ने अम्फान राहत में कथित अनियमितता के पीछे एक ‘ज्यामितीय नक्से’ जैसे नेटवर्क का आरोप लगाया। उन्होंने अपने आरोपों में अभिषेक बनर्जी, मितुन दे, जहांगीर पुष्पा, देबराज चक्रवर्ती और सुमित राय समेत कई नामों का उल्लेख किया।
उन्होंने दावा किया कि इनमें से कुछ लोग प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर प्रभावशाली भूमिका में थे। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में संबंधित लोगों का पक्ष सामने आना और स्वतंत्र जांच से इनकी पुष्टि होना महत्वपूर्ण होगा।
CAG रिपोर्ट के बाद सवाल
अम्फान के बाद अब ‘सेबाश्रय’ स्वास्थ्य शिविरों को लेकर भी राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। अभिषेक बनर्जी की पहल से दूरदराज के इलाकों में चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया गया था।
ऋतब्रत ने आरोप लगाया कि इस परियोजना में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता हुई। उन्होंने सेबाश्रय को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए और परियोजना में इस्तेमाल हुई धनराशि तथा संसाधनों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए।
हालांकि, इन आरोपों को रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों से अलग करके देखना जरूरी है।
CAG रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकाले गए हैं और किन बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज की गई है, इसका अंतिम आकलन विधानसभा में होने वाली विस्तृत चर्चा और आधिकारिक दस्तावेजों के अध्ययन के बाद ही किया जाना उचित होगा।
ऋतब्रत का अभिषेक बनर्जी पर सीधा हमला
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऋतब्रत बनर्जी ने इन कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अभिषेक बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि अम्फान और सेबाश्रय से जुड़े धन के इस्तेमाल की गहन जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कुछ बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए धन को विदेशों में भेजे जाने की आशंका भी जताई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी के राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
CAG रिपोर्ट के बाद विधानसभा में होगी विशेष चर्चा
शनिवार को CAG रिपोर्ट विधानसभा में पेश होने के बाद मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विशेष विधानसभा सत्र आयोजित किए जाने की बात कही है।
ऋतब्रत बनर्जी ने भी विशेष सत्र में रिपोर्ट पर चर्चा की ओर इशारा करते हुए कहा कि पूरी रिपोर्ट का अध्ययन अभी नहीं हुआ है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर सामने आई जानकारियां गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
अब विशेष सत्र में CAG की रिपोर्ट के निष्कर्षों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। सरकार, विपक्ष और संबंधित राजनीतिक दलों की ओर से रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं पर अपने-अपने तर्क रखे जा सकते हैं।
क्या है आगे की चुनौती?
CAG रिपोर्ट सामने आने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि रिपोर्ट में दर्ज वित्तीय आपत्तियों और अनियमितताओं पर सरकार क्या कार्रवाई करती है। साथ ही, जिन मामलों में वित्तीय नुकसान या नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है, उनमें जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल अम्फान राहत और सेबाश्रय को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विधानसभा में होने वाली विशेष चर्चा इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर को और स्पष्ट कर सकती है।
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