डिजिटल डेस्क | Kolkata : अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ का असर अब पश्चिम बंगाल के निर्यात उद्योग पर साफ़ तौर पर दिखाई देने लगा है। राज्य के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों — चमड़ा, समुद्री खाद्य (सीफूड) और इंजीनियरिंग उत्पाद — पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है, जिससे हजारों नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है।
राज्य के उद्योग संगठनों के अनुसार, अमेरिका ने भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया है, जिससे कुल टैरिफ अब 50% तक पहुंच गया है। यह वृद्धि विशेष रूप से उन श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्रभावित कर रही है, जो पहले से ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा और लागत दबाव का सामना कर रहे हैं।
📊 पश्चिम बंगाल का योगदान और उत्पादन क्षमता
- भारत के कुल चमड़ा निर्यात में पश्चिम बंगाल का योगदान लगभग 50% है
- वार्षिक निर्यात मूल्य: ₹5,000–6,000 करोड़
- अमेरिका को निर्यात: लगभग 20% हिस्सा
- कोलकाता में इकाइयाँ:
- 538 चमड़ा कारखाने
- 230 फुटवियर इकाइयाँ
- 436 चमड़ा उत्पाद इकाइयाँ
🌍 यूरोपीय मार्ग और वैकल्पिक रणनीतियाँ
उद्योग विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह संकट यूरोपीय बाजारों को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि कोलकाता से अमेरिका भेजे जाने वाले कई उत्पाद पहले यूरोप से होकर गुजरते हैं। निर्यातक अब “मेड इन यूरोप” टैग प्राप्त करने के लिए आंशिक उत्पादन यूरोप में स्थानांतरित करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
इंडियन लेदर प्रोडक्ट्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद अजार ने बताया कि केवल भारत और ब्राज़ील को ही 50% टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को सिर्फ 19–20% शुल्क देना पड़ता है। इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो रही है।
इसी तरह, बंगाल के समुद्री खाद्य निर्यात — विशेषकर झींगा — पर भी असर पड़ा है। राज्य का राष्ट्रीय निर्यात में 12% योगदान है, और अनुमान है कि 5,000–6,000 करोड़ रुपये के व्यापार पर सीधा प्रभाव पड़ा है।
इंजीनियरिंग सेक्टर, जिसमें छोटे और मध्यम उद्यम शामिल हैं, त्योहारों से पहले ऑर्डर रद्द होने की आशंका जता रहे हैं। कई इकाइयों ने उत्पादन घटाने या अस्थायी रूप से बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के पूर्वी क्षेत्रीय अध्यक्ष योगेश गुप्ता ने कहा,
“श्रम-प्रधान उद्योग भारी दबाव में हैं। अमेरिका के टैरिफ से बंगाल के निर्यात पर सबसे बड़ा असर पड़ा है।”
भारतीय चमड़ा उत्पाद संघ के प्रतिनिधि मोहम्मद अजार ने कहा,
“भारत और ब्राज़ील पर 50% शुल्क, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया को सिर्फ़ 20% — यह असमानता हमारे उद्योग को नुकसान पहुँचा रही है।”
राज्य सरकार ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है और निर्यातकों को राहत देने के लिए विशेष पैकेज पर विचार किया जा रहा है।
👞 फुटवियर श्रेणी सबसे अधिक प्रभावित
वैश्विक चमड़ा निर्यात में फुटवियर की हिस्सेदारी 40% है। उद्योग के हितधारकों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में भारत से अमेरिका को चमड़े के फुटवियर का निर्यात लगभग $500 मिलियन (₹4,000 करोड़) रहा। इस श्रेणी पर सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है।
बंताला चमड़ा केंद्र, जो कोलकाता का प्रमुख निर्यात हब है, वहां कार्यरत लाखों श्रमिकों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। चमड़ा निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका उनका सबसे बड़ा खरीदार है, और टैरिफ वृद्धि के बाद ऑर्डर में 30% तक की गिरावट दर्ज की गई है।
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