Amartya sen

अमर्त्य सेन का बंगाल SIR पर तीखा हमला: ‘यह वोटरों के साथ अन्याय, लोकतंत्र के लिए अनुचित’

कोलकाता, 25 जनवरी 2026: नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है।

उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया ‘काफी जल्दबाजी में’ की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक भागीदारी को नुकसान पहुंच सकता है – खासकर जब विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों में होने वाले हैं।

सेन ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में मतदाता सूची में संशोधन की जरूरत को स्वीकार किया, लेकिन इसे सावधानी और पर्याप्त समय के साथ करने पर जोर दिया।

अमर्त्य सेन की मुख्य चिंता क्या है?

92 वर्षीय अमर्त्य सेन ने कहा कि मतदाता सूची की समीक्षा लोकतंत्र में महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे सही परिस्थितियों में किया जाना चाहिए।

SIR bengal

उन्होंने कहा, “अगर मतदाता सूची की पूरी तरह समीक्षा सावधानी और पर्याप्त समय के साथ की जाए, तो यह एक अच्छी लोकतांत्रिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इस समय पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं हो रहा है।”

SIR प्रक्रिया में जल्दबाजी का आरोप

सेन ने SIR को ‘जल्दबाजी में’ किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मताधिकार रखने वाले लोगों को आने वाले विधानसभा चुनावों में वोट देने के अधिकार को साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने का पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा है।

सेन के अनुसार, यह न सिर्फ मतदाताओं के साथ अन्याय है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के लिए भी अनुचित है।

मतदाताओं पर क्या असर पड़ रहा है?

अमर्त्य सेन ने चिंता जताई कि SIR से लाखों लोगों की मतदाता सूची से नाम कटने का खतरा है। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त समय और सावधानी के यह प्रक्रिया उन लोगों को प्रभावित कर रही है जो चुनाव में भाग लेना चाहते हैं।

SIR WB Update

सेन ने जोर दिया कि लोकतंत्र में हर नागरिक की आवाज महत्वपूर्ण है, और जल्दबाजी में की गई समीक्षा से यह आवाज दब सकती है।

चुनाव से पहले का समय क्यों महत्वपूर्ण?

सेन ने कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण SIR प्रक्रिया का समय गलत है। उन्होंने कहा कि चुनावी मौसम में ऐसी जल्दबाजी से लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।

सेन ने सुझाव दिया कि मतदाता सूची की समीक्षा को अधिक समय और सावधानी से किया जाना चाहिए ताकि कोई भी नागरिक अपने अधिकार से वंचित न रहे।

लोकतंत्र पर खतरे का आकलन

सेन ने कहा कि SIR जैसी प्रक्रिया अगर ठीक से नहीं की जाती, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए अनुचित है।

उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को वोट देने का अधिकार होना चाहिए, और जल्दबाजी में की गई कोई भी कार्रवाई इस अधिकार को कमजोर कर सकती है।

Voter list revision intensifies in Bengal, 6.56 crore forms distributed under SIR

सेन का यह बयान राज्य में SIR को लेकर चल रहे विवाद को और हवा दे सकता है।

क्या SIR प्रक्रिया वाकई जल्दबाजी में है या जरूरी सफाई? आप क्या सोचते हैं – कमेंट में बताएं!

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