संवाद सूत्र, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सबंग ब्लॉक में कृषि भूमि को कथित रूप से जलाशय (जलाभूमि) के रूप में दर्ज कर भूमि अभिलेखों में अनियमितता किए जाने के आरोप में शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसानों और खेत मजदूरों ने बीडीओ कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। लगातार बारिश के बावजूद सैकड़ों प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि रामभद्रपुर मौजा के केलेघाई नदी तटीय क्षेत्र की लगभग 437 एकड़ तीन फसली कृषि भूमि, जिससे करीब 800 किसान जुड़े हैं, का पहले मछली पालन (भेड़ी) के लिए उपयोग कराया गया था। किसानों के अनुसार, इस संबंध में उच्च न्यायालय ने भूमि को पूर्व स्थिति में बहाल करने का निर्देश दिया था, लेकिन बाद में भूमि अभिलेखों में संशोधन कर उसे जलाभूमि के रूप में दर्ज कर दिया गया, जिससे किसानों को अपनी जमीन वापस मिलने में कठिनाई हो रही है।
किसानों और महिला किसानों ने आरोप लगाया कि पहले भूमि से जुड़े अनियमित कार्य किए गए और बाद में सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव कर उन्हें वैध स्वरूप देने का प्रयास किया गया। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने और कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी खुलासा करने की मांग की।
किसान एवं खेत मजदूर संगठनों के संयुक्त मंच के नेतृत्व में निकले जुलूस के बाद बीडीओ कार्यालय तथा ब्लॉक भूमि एवं भूमि सुधार (बीएलआरओ) कार्यालय के समक्ष सभा आयोजित की गई। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज करते हुए भूमि कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना एवं घेराव किया जाएगा।
सभा में किसान नेताओं और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने किसानों, खेत मजदूरों और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक जन आंदोलन की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही कृषि, रोजगार, श्रमिक अधिकार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए 10 अगस्त को प्रस्तावित ‘जेल भरो आंदोलन’ में अधिकाधिक भागीदारी की अपील की।
प्रदर्शन के दौरान कृषि भूमि की सुरक्षा, कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेदखल किए गए पट्टाधारकों और बटाईदारों को भूमि लौटाने, भूमि घोटाले में संलिप्त लोगों की गिरफ्तारी, ग्रामीण सड़कों की मरम्मत, शिक्षा एवं मिड-डे मील व्यवस्था को सुदृढ़ करने, मनरेगा के तहत 200 दिन रोजगार और 600 रुपये दैनिक मजदूरी, भूमिहीन परिवारों को भूमि पट्टा एवं आवासीय भूमि उपलब्ध कराने तथा प्रीपेड स्मार्ट बिजली मीटर योजना वापस लेने सहित विभिन्न मांगें उठाई गईं। इसके अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली, श्रम कानूनों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई।
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