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बंगाल चुनाव 2026: मुस्लिम वोट बैंक पर सबकी नजर, कितना अहम है ‘M’ फैक्टर?

कोलकाता, 26 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, मुस्लिम मतदाता एक बार फिर सबसे हॉट टॉपिक बन गए हैं। हर पार्टी इस वोट बैंक को अपने पाले में लाने की कोशिश में जुटी हुई है।

तेलंगाना, बिहार और महाराष्ट्र के बाद अब असदुद्दीन ओवैसी की नजर बंगाल पर है। उनकी पार्टी AIMIM ने TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया है। ऐसे में मुस्लिम वोट को लेकर लड़ाई और तेज हो गई है।

मुस्लिम वोट बैंक कितना अहम?

पश्चिम बंगाल की कुल आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी करीब 27 से 30 प्रतिशत मानी जाती है। अनुमान के मुताबिक, राज्य की मौजूदा आबादी 10.5 करोड़ से ज्यादा है, जिसमें मुस्लिम जनसंख्या 3 करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है।

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कुछ जिलों में तो मुस्लिम आबादी दूसरे समुदायों से काफी ज्यादा है। इन्हें लोकल भाषा में ‘मामु’ भी कहा जाता है।

  • मुर्शिदाबाद: 66.3% मुस्लिम आबादी
  • मालदा: 51.3%
  • उत्तर दिनाजपुर: 50%
  • बीरभूम: 37%
  • दक्षिण 24 परगना: 35.5%
  • नादिया: 26.7%
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इन जिलों की लगभग 85 से 110 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में होते हैं। यानी जिस तरफ मुस्लिम वोट का रुझान होगा, उसी उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जाती है।

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2021 में क्या हुआ था?

2021 के चुनाव में TMC ने मुस्लिम वोट का बड़ा हिस्सा (70-80%) अपने पक्ष में किया था। इसी वजह से पार्टी ने 215 सीटें जीतीं। मुस्लिम बहुल इलाकों में TMC ने 75 सीटें जीतीं, जबकि BJP को सिर्फ 9 सीटें मिलीं। कांग्रेस और वामपंथी लगभग गायब हो गए थे।

अब 2026 में क्या बदलाव?

हुमायूं कबीर ने साफ कहा है कि वे बंगाली भाषी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करेंगे, जबकि ओवैसी गैर-बंगाली मुसलमानों का। गठबंधन ने 200 सीटों पर लड़ने का ऐलान किया है। अगर यह गठबंधन मुस्लिम वोट में सिर्फ 4-8% भी कटौती कर दे, तो TMC की कई कांटे की सीटें BJP के पाले में जा सकती हैं।

चुनाव

निष्कर्ष

हुमायूं कबीर और ओवैसी का गठबंधन TMC के चुनावी समीकरण को बिगाड़ सकता है, लेकिन पूरी तरह बिगाड़ने की क्षमता अभी नहीं दिख रही है। असर मुख्य रूप से 40-60 मुस्लिम बहुल सीटों पर दिखेगा।

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अगर गठबंधन स्थानीय मुद्दों पर मजबूत प्रचार कर पाता है, तो TMC को 10-18 सीटों का नुकसान हो सकता है। लेकिन अगर मुस्लिम वोटर “टैक्टिकल वोटिंग” अपनाते हैं, तो गठबंधन का प्रभाव सीमित रह जाएगा।

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