बद्रीनाथ साव, कोलकाता | 29 सितंबर 2025 : दुर्गा पूजा का पर्व जहां एक ओर मां दुर्गा की शक्ति और विजय का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह समाज में महिलाओं के अथक संघर्ष और उनके बलिदान को भी याद दिलाता है।
इस बार दुर्गा पूजा में अजय संहति क्लब द्वारा ‘सर्वंसाहा’ की अवधारणा को दर्शाते हुए, ‘फूलमोनी की पूजा: घर और बाहर’ नामक एक अनूठी पहल के माध्यम से उन लाखों महिलाओं की कहानी बयां की जा रही है, जो अपने दैनिक जीवन के संघर्षों में ही असली दुर्गा का रूप हैं।
जीवन का संग्राम जारी:
इस पहल के केंद्र में फूलमोनी नामक एक महिला की कहानी है, जो सुबह चूल्हे की धुएं और हांडी में चावल के साथ अपने दिन की शुरुआत करती है।
उसके बाद वह दिनभर खेतों में मजदूर के रूप में काम करती है, जहां पुरुषों की तुलना में उसे कम मजदूरी मिलती है।
शहरों में वह बर्तन मांजती है, ईंट भट्टों में कड़ी मेहनत करती है, और फिर घर आकर परिवार तथा बच्चों की जिम्मेदारी संभालती है। घर के अंदर और बाहर, हर जगह का बोझ उसी के कंधों पर है।
🌾 फूलमोनी: संघर्ष की देवी
- फूलमोनी एक प्रतीक है उन लाखों महिलाओं का, जो
- सुबह चूल्हे की धुंआ और हांडी में चावल से दिन शुरू करती हैं
- खेतों में पुरुषों से कम मजदूरी पर काम करती हैं
- शहरों में बर्तन मांजती हैं, ईंट भट्टों में श्रम करती हैं
- घर लौटकर बच्चों की देखभाल और पारिवारिक जिम्मेदारियाँ निभाती हैं
- उनके लिए दाल-भात का सादा भोजन और बच्चों की मुस्कान ही पूजा का आनंद है
‘पूजा’ का आनंद:
इन सब संघर्षों के बावजूद, फूलमोनी को अपने बच्चों के चेहरों में नए कपड़ों पर खिली मुस्कान और सादगी से दाल-भात खाने के सुख में ही जीवन का असली आनंद मिलता है।
जीवन के इसी चक्र में, यही उसके लिए ‘पूजा’ का सच्चा अर्थ है। फूलमोनी जानती है कि वही असली दुर्गा है, जो हर दिन संघर्षों में जीती है, जो अपने जीवन से ही एक पूजा का निर्माण करती है।’
🎨 मंडप की कलात्मक प्रस्तुति
- थीम संकल्पना: अमर सरकार
- प्रतिमा निर्माण: अभिषेक भट्टाचार्य — माँ दुर्गा को फूलमोनी के रूप में दर्शाया गया
- संगीत संयोजन: तीर्थ भट्टाचार्य, त्रिदीब भट्टाचार्य, दीप काइज़र बसु
- प्रकाश निर्देशन: प्रेमेंदु बिकाश चाकी — मंडप में प्रकाश की भाषा से भावनाओं को उकेरा गया
सामाजिक संदेश:
यह पहल एक सामाजिक संदेश दे रही है कि सच्ची शक्ति और भक्ति उन महिलाओं के जीवन में निहित है जो अपने परिवार के लिए निस्वार्थ भाव से संघर्ष करती हैं, और वही हमारी वास्तविक दुर्गा हैं।
इस थीम की अवधारणा और योजना अमर सरकार द्वारा की गई है और अभिषेक भट्टाचार्य ने प्रतिमा का निर्माण किया है।
तीर्थ भट्टाचार्य, त्रिदीब भट्टाचार्य और दीप काइज़र बसु ने इसमें संगीतमय आभा दी है, जबकि प्रेमेंदु बिकाश चाकी ने प्रकाश व्यवस्था का निर्देशन किया है।
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