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80 के दशक की एआई तस्वीरें : यादों का रंग या डिजिटल पहचान का खतरा? – डॉ. विक्रम चौरसिया

नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से लगातार लोग कह रहे थे सर, आप भी 80 के दशक वाली एआई तस्वीर बनाइए। आखिरकार लोगों के आग्रह पर मैंने भी सोचा, चलिए प्रयास करते हैं। फिर ख्याल आया 80 के दशक में तो मेरा जन्म ही नहीं हुआ था, वहां जाकर क्या करूंगा! क्यों न उससे भी बहुत पहले चला जाऊं? उस समय तो राजा-महाराजाओं का दौर रहा होगा।

मजाक में मन ने कहा क्या पता, कभी मेरी ही आत्मा किसी राजा-महाराजा के रूप में रही हो! बस, एआई ने कल्पना को तस्वीर बना दिया। यह केवल एक मजेदार प्रयोग था, लेकिन इसी बहाने आज की एक बड़ी सच्चाई सामने आती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब हमारी साधारण तस्वीरों को किसी भी दौर, शैली या कल्पना में बदल सकती है।

सोशल मीडिया पर 80 के दशक का यह चलन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पुराने कपड़े, हेयरस्टाइल, चश्मे, कैमरे की रोशनी और उस दौर का वातावरण एआई कुछ ही क्षणों में वर्तमान चेहरे को अतीत के रंग में ढाल देता है। शायद आकर्षण इसलिए भी है क्योंकि 80 का दशक आज भी दूरदर्शन, सिनेमा, संगीत और पारिवारिक तस्वीरों की स्मृतियों में जीवित है।

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लेकिन तस्वीर के साथ हमारी पहचान भी जुड़ी है। किसी एआई सेवा पर अपनी तस्वीर अपलोड करने से पहले यह देखना जरूरी है कि वह तस्वीर और उससे जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल कैसे करती है। तस्वीर में घर, वाहन, कार्यालय, पहचान-पत्र या दूसरी निजी जानकारी दिखाई दे तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।एआई के साथ तस्वीरों के दुरुपयोग, पहचान की नकल और भ्रामक चित्रों की संभावना भी बढ़ रही है।

इसलिए तकनीक से डरने की नहीं, उसे समझदारी से इस्तेमाल करने की जरूरत है। एक और पहलू पर्यावरण का है। एआई से तस्वीर कुछ क्षणों में बन जाती है, लेकिन उसके पीछे बड़े आंकड़ा केंद्र और कंप्यूटिंग प्रणालियां काम करती हैं, जिनमें ऊर्जा और संसाधनों की खपत होती है। इसलिए मनोरंजन और जिम्मेदारी के बीच संतुलन भी जरूरी है।

80 के दशक में जन्म नहीं हुआ तो एआई ने मुझे उससे भी पीछे पहुंचा दिया राजा-महाराजाओं के दौर में। आत्मा सचमुच कभी वहां थी या नहीं, यह तो रहस्य है; लेकिन कल्पना को तस्वीर में बदलने की ताकत आज एआई के पास जरूर है। नई तकनीक का आनंद लीजिए, पुरानी यादों को नए रंग दीजिए बस अपनी डिजिटल पहचान की सुरक्षा को कभी पुराना मत होने दीजिए।

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चिंतक /मेंटर /एक्टिविस्ट दिल्ली विश्वविद्यालय

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