विश्व की तमाम सेनाओं में भर्ती दो तरह से की जाती है :-
1. अनिवार्य सैन्य सेवा
2. स्वैच्छिक सैन्य सेवा

1. नागरिकों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा : इसमें हर नागरिक को एक खास उम्र के दौरान सेना में अपनी सेवाएं देना अनिवार्य होता है। दुनिया के करीब 80 देशों में यह योजना लागू है जिनमें इजरायल, सऊदी अरब, उत्तरी कोरिया, सीरिया और चीन जैसे देश शामिल हैं।

2. नागरिकों के लिए स्वैच्छिक सैन्य सेवा : इसमें नागरिकों के पास यह विकल्प होता है कि वह देश की सेना में अपनी सेवाएं दे सके। लेकिन ऐसा करना अनिवार्य नहीं होता है। अगर वह सेना में जाना चाहे तो वह खास ट्रेनिंग लेकर एक सीमित समय तक सेना में काम कर सकता है।

अग्निपथ योजना : भारत सरकार द्वारा घोषित अग्निपथ उक्त दोनों सेवा से अलग है। यह कुछ-कुछ जापान में शुरू की गई और कारपोरेट जगत में अपनाई जाने वाली just-in-time (JIT) की तरह है जिसमें न्यूनतम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। आसान भाषा में कहें तो स्कूलों में निविदा पर भर्ती किए जाने वाले शिक्षामित्रों की तरह इन्हें “सेना मित्र” कह सकते हैं।

उद्देश्य : सरकार के अनुसार इस योजना का उद्देश्य पेंशन के खर्चों में बचत करना है और सेना की मौजूदा औसत उम्र 32 साल को अगले 6 साल में घटाकर 26 साल करना है। इसके अंतर्गत युवाओं को देशप्रेम की ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती युवाओं को सेना में अग्निवीर कहा जाएगा। 4 साल के कार्यकाल के बाद अग्निवीरों को नागरिक समाज में शामिल किया जाएगा जहां वह राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में योगदान दे सकते हैं।

प्रमुख विशेषताएं : इसमें हर साल करीब 45, 000 युवाओं को सेना में शामिल किया जाएगा। साढ़े 17 साल से 21 साल की उम्र के युवा इस योजना के तहत सेना में भर्ती हो सकते हैं। यह भर्तियां मेरिट और मेडिकल टेस्ट के आधार पर की जाएगी। चयनित युवाओं को 4 साल के लिए सेना में सेवा देने का मौका मिलेगा। इन चार वर्षों में अग्नि वीरों को 6 महीने की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग दी जाएगी।

वेतन और भत्ते :- अग्नि वीरों को पहले वर्ष 30,000 दूसरे वर्ष 33 हजार, तीसरे वर्ष 36,500 हजार और चौथे वर्ष 40000 वेतन और अन्य लाभ दिए जाएंगे। इस दौरान अग्निवीर तीनों सेनाओं के स्थाई सैनिकों की तरह अवार्ड, मेडल और इंश्योरेंस कवर पाएंगे। 4 साल पूरा होने के बाद 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थाई काडर में भर्ती किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उन्हें जोखिम भत्ता, राशन एवं उपयुक्त यात्रा छूट भी मिलेगी। उन्हें उच्च शिक्षा के लिए कौशल पात्रता प्रमाण पत्र भी मिलेगा।

आर्थिक पैकेज सेवा निधि :- अग्निवीरों के मासिक वेतन के 30% हिस्से का योगदान अग्निवीर द्वारा तथा इसके बराबर राशि का योगदान सरकार द्वारा भी किया जाएगा। 4 साल बाद जो अग्निवीर सेना से बाहर होंगे उन्हें सेवा निधि पैकेज के तहत करीब 13.10 लाख रुपए एकमुश्त मिलेंगे।

बीमा कवर :- सेवा के दौरान शहीद होने पर अग्निवीर के परिवार को एक करोड़ की राशि और शेष सेवा का वेतन मिलेगा। इसके अतिरिक्त परिवार को 4 साल के बाद सेवा मुक्त होने के बाद मिलने वाला आर्थिक पैकेज भी मिलेगा।

विकलांग होने की स्थिति में :- 100% विकलांगता पर 44 लाख, 70% विकलांगता पर 25 लाख और 50% विकलांगता पर 15 लाख की अतिरिक्त अनुग्रह राशि अग्निवीरों को मिलेगी। विकलांग अग्निवीरों को शेष सेवा अवधि का वेतनमान भी मिलेगा।

सेना की स्थायी सेवा में शामिल होने का अवसर :- 4 साल का कार्यकाल पूरा होने पर 25 प्रतिशत अग्निवीर सेना में स्थायी रूप से शामिल होने के लिए आवेदन कर सकेंगे। 4 साल की सेवा अवधि के दौरान अच्छा प्रदर्शन करने वालों को स्थायी सेवा में शामिल किया जाएगा। तब उन्हें वेतन, पेंशन , ग्रेच्युटी आदि लाभ मिल सकेंगे।

कब से शुरू :- आज से 90 दिनों के अंदर इसकी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

किस सेना में कितनी भर्ती होगी?? शुरुआत में अग्निपथ योजना के तहत लगभग 44000 सैनिकों की भर्ती थल सेना में, साढ़े तीन हजार सैनिकों की भर्ती वायुसेना में और 3000 सैनिकों की भर्ती नौसेना में होगी

लड़के और लड़कियों दोनों के लिए मौका :- नौ सेना के चीफ एडमिरल ने कहा है कि नौसेना में युवक व युवतियां दोनों आवेदन करने के पात्र होंगे।

नुकसान :-
1. 4 साल बाद सेवामुक्त अग्निवीर ग्रेच्युटी और पेंशन के हकदार नहीं होंगे।

2. पहले साल उनके हाथ में केवल 21 हज़ार रुपये आएंगे जो कि सम्मानजनक जीवन यापन के लिए बहुत कम है।

3. अग्निवीर वस्तुतः केवल 2 साल 9 महीने की सेवा प्रदान कर पाएंगे क्योंकि उनके छह माह ट्रेनिंग में निकल जाएंगे और चार साल में लगभग ब 9 महीने वह छुट्टी पर रहेंगे।

4. स्थाई नौकरी वाले फौजियों की ड्यूटी क्षेत्र पर भी असर पड़ेगा।

5. चार साल सेना में सेवा करने के पश्चात वापस लौटने के बाद काम मिलना आसान नहीं होता। उन्हें पूर्व सैनिकों का दर्जा भी नहीं मिलेगा।

6. काम चलाऊ ट्रेनिंग खतरनाक होती है। इससे वह पूरी तरह प्रशिक्षित सैनिक नहीं बन पाएंगे।

7. नई व्यवस्था में रेजीमेंट व्यवस्था खत्म होने से जवानों का नाम, नमक और निशान से लगाव खत्म हो जाएगा।

8. पूरी तरह से प्रशिक्षण न मिलने पर एक सैनिक किसी के भी जीवन को खतरे में डाल सकता है।

9. इसका एक नुकसान यह भी होगा कि जैसा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीआर चौधरी ने कहा कि अब सारी भर्तियां अग्निपथ योजना के तहत ही होगी। इससे उन युवाओं को निराशा होगी जो 2 साल से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं या जो सेना में भर्ती के लिए मेडिकल और फिजिकल पास कर चुके हैं।

10. इतने बड़े प्रयोग को छोटे स्तर पर शुरू किया जाना चाहिए था। क्योंकि एक आशंका यह भी है कि 4 साल के बाद बेरोजगार हुए इन युवाओं का उपयोग गैर सामाजिक गतिविधियों और देश विरोधी गतिविधियों में भी किया जा सकता है।

लाभ:
1. इजरायल की तर्ज पर देश में अधिक सेना संख्या में प्रशिक्षित युवक उपलब्ध होंगे जो किसी आपात स्थिति में सेना का सहयोग कर सकते हैं।

2. इस योजना से युवाओं विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र के गरीब युवाओं के लिए वरदान साबित हो सकती है। क्योंकि 17-18 वर्ष की आयु में वे कमाने लगेंगे और अगर उन्हें सेना में स्थाई नहीं किया जाता है तब भी 4 साल बाद उनके पास पर्याप्त धन होगा जिससे वे कोई व्यवसाय या आगे की पढ़ाई कर सकते हैं।

3. बेरोजगारी कम करने में कुछ हद तक मदद मिलेगी क्योंकि सरकार ने इस योजना के साथ अगले डेढ़ वर्षो में 10 लाख और भर्ती करने का ऐलान किया है।

4. इस दूरदर्शी फैसले से युवा अनुशासित, कौशल पूर्ण और सशक्त बनेंगे।

5. पिछले 2 वर्षों में कोरोना के कारण सेना, सैनिकों की कमी से जूझ रही है। इस योजना से उन्हें तत्काल और कम समय में सैनिक मिल जाएंगे।

6. कम उम्र में रोजगार मिलने से युवा नशाखोरी व अन्य व्यसनों से दूर रहेंगे।

7. विभिन्न राज्य सरकारों और पीएसयू ने ऐसे युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इससे युवा अपने भविष्य को लेकर कम आशंकित रहेंगे।

8. मध्य प्रदेश सरकार ने इन युवाओं को पुलिस में तथा गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों में इन युवाओं को प्राथमिकता देने की घोषणा पहले ही कर दी है।

9. प्रत्येक अग्निवीर को 4 साल के बाद उसके यूनीक बायोडाटा का हिस्सा बनने के लिए एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

10. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष जगदीश कुमार ने कहा कि अग्निपथ योजना के तहत सशस्त्र बलों में शामिल होने वाले अग्निवीरों के कौशल को मान्यता देने की दिशा में आयोग काम करेगा ताकि 4 साल की सेवा के बाद अग्निवीरों को जब स्नातक की डिग्री प्राप्त करने में किसी मुश्किल का सामना न करना पड़े।

निष्कर्ष :- पूर्व सैनिक होने के नाते मैं इस योजना को लेकर आशान्वित भी हूँ और कुछ संदेह भी मेरे मन में हैं। एक और जहां मुझे लगता है कि इस योजना से हम इजराइल की तरह एक सशक्त देश का निर्माण करने में सक्षम होंगे जिसका हर नागरिक सैनिक होगा। साथ ही युवाओं को रोजगार मिल सकेगा और वे सशक्त तथा सक्षम बनेंगे। वहीं दूसरी ओर मुझे लगता है कि स्थाई सेवा में शामिल होने के लिए अग्निवीर चापलूसी, जी- हजूरी भी कर सकते हैं। इससे सेना के मनोबल पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

Vinay Singh
विनय सिंह बैस

(विनय सिंह बैस)
एयर वेटेरन

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