कोलकाता, (Kolkata) : बिहार में हाल ही में शुरू की गई SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया ने मतदाता सूची के सुधार और अद्यतन में नई गति लाई है। अब सवाल उठ रहा है—क्या यही प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में भी लागू की जाएगी?
हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चेतावनी दी थी कि राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू होता है, तो वह पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से एक भी परिवार का नाम नहीं हटने देंगी।
- 📢 चुनाव आयोग का बयान
चुनाव आयोग ने इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “हर राज्य की भौगोलिक और प्रशासनिक जरूरतें अलग होती हैं। SIR एक विशेष परिस्थिति में शुरू की गई प्रक्रिया है, जिसे अन्य राज्यों में लागू करने से पहले स्थानीय जरूरतों का मूल्यांकन किया जाएगा।”

इस बयान से स्पष्ट है कि फिलहाल बंगाल में SIR की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इसकी संभावना से इनकार भी नहीं किया गया है।
बनर्जी ने कहा कि अगर नाम हटाए गए तो वह विरोध प्रदर्शन करेंगी और बिहार जैसी स्थिति नहीं होने देंगी।
ममता बनर्जी ने कोलकाता में शहीद दिवस के उपलक्ष्य में कहा था, “अगर बिहार की सूची से लाखों लोगों का नाम हटाया गया और यहां भी ऐसी ही घटनाएं हुईं, तो हम विरोध करेंगे। अगर बंगाल में एसआईआर हुआ, तो मैं एक भी नाम नहीं हटने दूंगी। हम इसका विरोध करेंगे और इस विरोध को बड़े पैमाने पर बढ़ाएंगे।”
🔍 क्या है SIR प्रक्रिया?
- मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण
- मृत या स्थानांतरित मतदाताओं का नाम हटाना
- नए योग्य मतदाताओं का नाम जोड़ना
- पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना
🌐 बंगाल में क्यों है चर्चा?
पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर SIR जैसी प्रक्रिया की मांग उठ रही है। कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने आयोग से इस दिशा में पहल करने की अपील की है।
🧭 आगे क्या?
- आयोग स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट मांग सकता है
- पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ जिलों में SIR लागू हो सकता है
- नागरिकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा सकते हैं
बता दें कि बिहार (Bihar) में स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) को लेकर हंगामा मचा हुआ है। आरजेडी (RJD) समेत महागठबंधन के नेता चुनाव आयोग (Election Commission) पर बीजेपी (BJP) के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगा रहे हैं।
वहीं, अन्य विपक्षी दलों वाले राज्यों को भी डर है कि उनके यहां भी एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, जिससे वोटर्स के नाम कट सकते हैं। चुनाव आयोग ने इस पर सफाई दी है। उसने कहा है कि बिहार के बाद बंगाल और अन्य राज्यों में भी उचित समय पर एसआईआर होगा।
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