कोलकाता | 2 दिसंबर 2025 : संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ड्रामा’ वाले बयान पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने जोरदार पलटवार किया है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि विपक्ष की मांगों को ‘नाटक’ बताकर केंद्र सरकार बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान के दौरान हुई 40 मौतों की जवाबदेही से बच रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मतदाता सूची के इस ‘जल्दबाजी वाले’ प्रक्रिया पर बहस की मांग करना ‘ड्रामा’ है?
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि संसद ‘ड्रामा’ का मंच नहीं, बल्कि ‘डिलीवरी’ का स्थान है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि वे चुनावी तैयारी के लिए संसद को ‘वार्म-अप एरिना’ बना रहे हैं।

बनर्जी ने इस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “विपक्ष SIR पर बहस मांग रहा है। क्या यह ड्रामा है? अगर लोगों की आवाज उठाना ड्रामा है, तो अगले चुनाव में जनता ही इसका जवाब देगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही वैकल्पिक नहीं हो सकती।
बनर्जी ने SIR अभियान को ‘अनियोजित और खराबी से भरा’ बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसरों (BLOs) को न तो ट्रेनिंग दी और न ही संसाधन उपलब्ध कराए।
नतीजा यह हुआ कि बंगाल में करीब 40 लोग, जिनमें कई BLOs शामिल हैं, इस प्रक्रिया के दौरान दबाव और थकान से मारे गए।
उन्होंने कहा, “BLOs ने खुद चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार कहां है? केंद्र ने बंगाल के 2 लाख करोड़ रुपये के फंड रोक रखे हैं, जो राज्य के विकास को प्रभावित कर रहा है।”
मुख्य बिंदु: SIR अभियान और मौतों का विवाद
| मुद्दा | विवरण |
|---|---|
| SIR क्या है? | चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन अभियान, जो बंगाल में हाल ही में चला। |
| मौतों का आंकड़ा | टीएमसी के दावे के अनुसार 40 मौतें, मुख्य रूप से BLOs की थकान और प्रक्रिया की जल्दबाजी से। |
| विपक्ष की मांग | संसद में औपचारिक बहस; प्रक्रिया में सुधार और मौतों की जांच। |
| केंद्र का रुख | विपक्ष को ‘ड्रामा’ बताकर बहस टालना; बिहार चुनाव जीत पर ‘डिफेंसिव’ रवैया। |
बनर्जी ने केंद्र की आलोचना करते हुए डेमोक्रेटाइजेशन का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने ‘ब्लैक मनी रोकने में नाकाम’ बताया। उन्होंने कहा, “कुछ राज्यों में जीत जाना सरकार को जनता के प्रति जवाबदेही से मुक्त नहीं करता। वही वोटर जो सत्ता में लाए, वही हटा भी सकते हैं।”
विपक्ष चाहता है कि संसद सुचारू रूप से चले, लेकिन सरकार के ‘डिफेंसिव’ रवैये से ऐसा संभव नहीं हो रहा। टीएमसी नेता ने ‘पहलगाम’ मुद्दे का भी जिक्र किया, जहां कथित तौर पर सुरक्षा चूक हुई थी, और कहा कि सरकार चुनिंदा आक्रोश दिखा रही है।
बनर्जी की यह टिप्पणी संसद सत्र के पहले दिन के हंगामे के बीच आई है, जहां विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर बहस की मांग कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद शीतकालीन सत्र को और गरमा सकता है।
बनर्जी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार जवाबदेही नहीं दिखाएगी, तो बंगाल की जनता 2026 के विधानसभा चुनाव में इसका हिसाब लेगी।
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