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दो साल बाद फिर खुली आरजी कर केस की फाइल! अभया की अंतिम यात्रा को लेकर पिता ने दर्ज कराई नई FIR

कोलकाता हिन्दी न्यूज | 11 अगस्त 2026: आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला डॉक्टर ‘अभया’ की मौत के करीब दो साल बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। अभया के माता-पिता लंबे समय से जांच की दिशा और मामले में अब तक हुई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

अब अंतिम संस्कार के दौरान पानीहाटी श्मशान घाट पर कथित तौर पर हुई घटनाओं को लेकर अभया के पिता ने खड़दह थाने में नई एफआईआर दर्ज कराई है।

जानकारी के मुताबिक, नई एफआईआर में पानीहाटी के पूर्व विधायक निर्मल घोष, पानीहाटी नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन सोमनाथ दे और संदीप मुखोपाध्याय के नाम का उल्लेख किया गया है।

शिकायत में आपराधिक साजिश, कथित तौर पर सबूत मिटाने और दबाव डालकर काम कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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मामले को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी पानीहाटी श्मशान घाट में अभया के अंतिम संस्कार के दौरान हुई घटनाओं की जांच के निर्देश दिए हैं।

इसके बाद पुलिस स्तर पर नई कार्रवाई शुरू हुई है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी घटना के दिन की परिस्थितियों को लेकर अलग से जांच शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।

अभया के अंतिम संस्कार को लेकर क्या है विवाद?

अभया के पिता का आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद उनकी बेटी का शव परिवार को सौंपे जाने और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान जल्दबाजी की गई। उनका दावा है कि परिवार को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और कथित तौर पर कुछ लोगों के दबाव में शव को जल्द श्मशान ले जाया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया गया। अभया के पिता के मुताबिक, उस समय मौजूद कुछ लोगों की ओर से शव को जल्द पानीहाटी श्मशान घाट ले जाने का दबाव बनाया गया था।

अब पुलिस नई एफआईआर में लगाए गए आरोपों, संबंधित लोगों की भूमिका और उस दिन की पूरी घटनाक्रम की जांच करेगी।

महत्वपूर्ण: एफआईआर में दर्ज आरोप जांच के अधीन हैं। किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि केवल सक्षम न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद ही मानी जाएगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई

अभया की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर पानीहाटी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अंतिम संस्कार से जुड़ी घटनाओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने उस समय की परिस्थितियों की जांच कराने के निर्देश दिए।

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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बाराकपुर पुलिस कमिश्नरेट के स्तर पर मामले को देखने की प्रक्रिया शुरू हुई। पुलिस को यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि अभया के अंतिम संस्कार के दिन पानीहाटी श्मशान घाट में क्या हुआ था और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

इस घटनाक्रम के बाद अभया के पिता ने खड़दह थाने में नई शिकायत दर्ज कराई है।

स्वास्थ्य विभाग भी करेगा घटना के दिन की जांच

मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग ने भी घटना के दिन की परिस्थितियों की जांच शुरू की है।

जांच में यह देखा जा सकता है कि पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपने की प्रक्रिया क्या थी, संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही और परिवार को शव सौंपने से लेकर अंतिम संस्कार तक की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे जाने की बात कही जा रही है।

आरजी कर अस्पताल से बरामद हुआ था शव

गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के सेमिनार हॉल से एक युवा महिला डॉक्टर का शव बरामद हुआ था। घटना के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

कोलकाता पुलिस ने मामले में सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

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मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, अभया के माता-पिता लगातार इस बात पर सवाल उठाते रहे हैं कि क्या घटना में केवल एक व्यक्ति की भूमिका थी या इसके पीछे अन्य लोग भी शामिल थे।

सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाते रहे हैं माता-पिता

अभया के माता-पिता ने कई मौकों पर सीबीआई जांच को लेकर असंतोष जाहिर किया है। उनका कहना रहा है कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए और घटना से जुड़े सभी संभावित पहलुओं की जांच होनी चाहिए।

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अब अंतिम संस्कार से जुड़े घटनाक्रम पर नई एफआईआर और स्वास्थ्य विभाग की जांच शुरू होने से मामले का यह पहलू भी जांच के दायरे में आ गया है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नई एफआईआर में लगाए गए आरोप अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करते। पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही यह तय होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी बनती है।

CCTV, दस्तावेज और गवाहों से खुल सकता है राज

जांच के दौरान पुलिस के लिए उस समय के उपलब्ध CCTV फुटेज, श्मशान घाट के रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम एवं शव सौंपने से जुड़े दस्तावेज, पुलिस रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अहम साबित हो सकते हैं।

यदि उस समय की वीडियो रिकॉर्डिंग या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध हैं, तो उनसे घटनाक्रम की समय-रेखा तैयार करने में मदद मिल सकती है। साथ ही उन लोगों के बयान भी महत्वपूर्ण होंगे जो अस्पताल से लेकर श्मशान घाट तक की प्रक्रिया में मौजूद थे।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि नई एफआईआर के आधार पर पुलिस जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या नए साक्ष्य सामने आते हैं।

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अभया केस में अब आगे क्या?

अभया मामले में दो साल बाद एक बार फिर जांच के एक नए पहलू के सामने आने से कई पुराने सवाल चर्चा में हैं। एक तरफ नई एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच होनी है, वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग की जांच से भी उस दिन की परिस्थितियों को लेकर अतिरिक्त जानकारी सामने आ सकती है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभया के अंतिम संस्कार के दिन पानीहाटी श्मशान घाट में वास्तव में क्या हुआ था?

क्या परिवार के साथ किसी तरह का दबाव बनाया गया था? क्या निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था? और एफआईआर में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य उपलब्ध हैं?

इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने और साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही सामने आएगा।

निष्कर्ष

आरजी कर मामले में न्यायिक प्रक्रिया के एक चरण के पूरा होने के बावजूद अभया के माता-पिता द्वारा उठाए जा रहे सवाल पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। अब अंतिम संस्कार से जुड़ी नई एफआईआर ने मामले के एक अलग पहलू को जांच के केंद्र में ला दिया है।

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पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच से सामने आने वाले तथ्य यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि उस दिन की घटनाओं का वास्तविक क्रम क्या था।

नोट: इस खबर में उल्लेखित आरोप एफआईआर/शिकायत और संबंधित पक्षों के दावों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने तक नहीं मानी जानी चाहिए।

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