कोलकाता हिन्दी न्यूज | 14 अगस्त 2026: अभया कांड को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व विधायक निर्मल घोष और पूर्व पार्षद संजीव मुखोपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद अब राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग कर दी है।
अग्निमित्रा पाल का सवाल है कि यदि अभया के शव के जल्द अंतिम संस्कार से जुड़े आरोपों को लेकर निर्मल घोष और संजीव मुखोपाध्याय के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, तो उस समय राज्य की मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी को इससे अलग क्यों रखा जाए?
निर्मल और संजीव की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा विवाद
अभया के पिता की ओर से नए सिरे से दर्ज कराई गई शिकायत के बाद पुलिस ने गुरुवार को कार्रवाई करते हुए पूर्व विधायक निर्मल घोष को ओडिशा से गिरफ्तार किया। इसके बाद पूर्व पार्षद संजीव मुखोपाध्याय को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, मामले में नामजद एक अन्य व्यक्ति सोमनाथ दे अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
आरोप है कि अभया के शव के अंतिम संस्कार को लेकर जल्दबाजी की गई और परिवार को पर्याप्त समय नहीं दिया गया। इसी पूरे घटनाक्रम की दोबारा जांच की मांग अभया के पिता की ओर से की गई थी।
‘निर्मल घोष गिरफ्तार तो ममता बनर्जी क्यों नहीं?’
निर्मल घोष और संजीव मुखोपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद अग्निमित्रा पाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका पर सवाल उठाया।
अग्निमित्रा पाल ने कहा, “अगर निर्मल घोष गिरफ्तार होते हैं, तो ममता बनर्जी को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। क्योंकि उस समय वह मुख्यमंत्री थीं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय ममता बनर्जी को पोस्टमार्टम और शव को परिवार को सौंपने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्देश देने चाहिए थे।
हालांकि, ये आरोप फिलहाल अग्निमित्रा पाल के राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं और मामले में ममता बनर्जी की किसी आपराधिक भूमिका का न्यायिक रूप से निर्धारण इस बयान से नहीं होता।
‘पुलिस के जरिए परिवार का मुंह बंद कराने की कोशिश’
अग्निमित्रा पाल ने ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस के माध्यम से अभया के माता-पिता को चुप कराने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि यदि निर्मल घोष और सोमनाथ दे की गिरफ्तारी की मांग की जा रही है, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दिए थे कार्रवाई के निर्देश
अभया की स्मृति सभा के दौरान 9 अगस्त को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मामले में नए सिरे से कार्रवाई के संकेत दिए थे। उन्होंने पुलिस से नए सिरे से केस शुरू करने और तेजी से कार्रवाई करने को कहा था।
इसके बाद अभया के पिता ने लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में निर्मल घोष, संजीव मुखोपाध्याय और सोमनाथ दे के नाम सामने आए। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हुई और पहले निर्मल घोष तथा फिर संजीव मुखोपाध्याय की गिरफ्तारी हुई।
सोमनाथ दे अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर
मामले में नामजद सोमनाथ दे की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। ऐसे में अब इस मामले की जांच में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
दूसरी ओर, अग्निमित्रा पाल के बयान के बाद मामला एक बार फिर सीधे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। बीजेपी की ओर से जहां तत्कालीन सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं पूरे मामले की जांच और आरोपों की पुष्टि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
अभया कांड की जांच फिर चर्चा में
अभया कांड को लेकर उसके परिवार की ओर से लंबे समय से कई सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार का आरोप है कि घटना से जुड़े कई पहलुओं की पूरी तरह जांच नहीं हुई। इसी वजह से शव के अंतिम संस्कार से जुड़े घटनाक्रम को लेकर भी नए सिरे से जांच की मांग उठी।
अब दो गिरफ्तारियों के बाद मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में पुलिस की जांच और अदालत में होने वाली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि दर्ज आरोपों के आधार पर आगे किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती है।
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