।।दो तन-एक प्राण।।
आदित्य त्रिपाठी
मुरली की मनमोहक धुन पर
बहकी सुरभित रात सुहानी
लाज भरी पलकों ने कह दी
अनकही सी एक प्रेम-कहानी।
न राधा में राधा बाकी
न मोहन में श्याम रहे
प्रीत की ऐसी डोर बँधी कि
दो तन पर एक प्राण रहे।
यमुना तट की लहरें गाएँ
गाए पावन ब्रज की रेणु
राधा-राधा रटे कन्हैया
राधा ध्याए मोहन वेणु।
राधा के उर श्याम बसे हैं
श्याम हृदय में राधा धाम
जो राधा का नाम न बोले
मिले न उसको सुंदर श्याम।
अमर प्रेम की पावन मूरत
दोनों को कोटी प्रणाम
श्याम रंग में रंगी राधिका
राधा रंग में रंग गए श्याम॥

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