A unique initiative towards self-reliance; Handicrafts Exhibition at Scottish Church College

स्वनिर्भरता की दिशा में एक अनोखी पहल; स्कॉटिश चर्च कॉलेज में हस्तशिल्प प्रदर्शनी

संवाद सूत्र, कोलकाता : पश्चिम बंगाल की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है शांतिनिकेतन स्थित संस्था ‘आमार कुटिर’ और कोलकाता के ऐतिहासिक स्कॉटिश चर्च कॉलेज ने।

राज्य के विभिन्न जिलों की महिलाओं को हस्तशिल्प और स्व-उद्यम के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापार की दिशा दिखाने के उद्देश्य से इन दोनों संस्थाओं ने मिलकर दो दिवसीय एक विशेष हस्तशिल्प प्रदर्शनी का आयोजन किया, जिसका समापन शुक्रवार को हुआ।

इस प्रदर्शनी में भाग लिया उन महिलाओं ने जो ‘आमार कुटिर’ द्वारा संचालित डिजिटल बिक्री प्रशिक्षण और स्कॉटिश चर्च कॉलेज की उद्यमिता विकास योजना के माध्यम से आत्मनिर्भर बनी हैं।

A unique initiative towards self-reliance; Handicrafts Exhibition at Scottish Church College

उन्होंने प्रदर्शनी में नक्शीकांथा, टाई एंड डाई, बाटिक सहित विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रदर्शित किया।

कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मधुमंजरी मंडल ने इस पहल के बारे में कहा, “हम न केवल अपने छात्रों, बल्कि बाहरी इच्छुक लोगों को भी इस प्रशिक्षण में जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। स्कॉटिश चर्च कॉलेज से प्रशिक्षण प्राप्त कर कई महिलाएं अब अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर चुकी हैं। ऑनलाइन बिक्री की तकनीक में ‘आमार कुटिर’ उनका सहयोगी बना है।”

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में कॉलेज में ‘एंटरप्रेन्योर सेल’ की स्थापना की गई थी, जिसका नेतृत्व बंगाली विभाग की प्रोफेसर ललिता राय कर रही हैं।

उन्होंने बताया: “गत 11 मई, 2024 से हस्तशिल्प पर आधारित एक सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ किया गया है। अब तक इसके चार बैचों में कुल 63 प्रशिक्षार्थी सफलतापूर्वक प्रशिक्षण लेकर कार्यरत हो चुके हैं। यह पहल शिक्षा मंत्रालय के निर्देशानुसार व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।”

A unique initiative towards self-reliance; Handicrafts Exhibition at Scottish Church College

‘आमार कुटिर’ की प्रशिक्षक बन्या राय ने बताया कि “हमारा मुख्य उद्देश्य है कि पारंपरिक हस्तशिल्प को आधुनिक दृष्टिकोण और डिजिटल माध्यम से युवा पीढ़ी के लिए व्यवसायिक रूप से उपयोगी बनाया जाए।”

इस दो दिवसीय आयोजन ने न केवल ग्रामीण और शहरी महिलाओं के हुनर को एक मंच प्रदान किया, बल्कि उन्हें डिजिटल युग के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ने का उत्साह भी दिया। यह पहल राज्य में महिला सशक्तिकरण और स्थानीय कारीगरी को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

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