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हरियाली की फुहार : कुचलाचाटी विद्यालय में उठा पर्यावरण चेतना का सूरज

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत खड़गपुर के हिजली की गोद में बसा एक छोटा-सा विद्यालय आज प्रकृति की नई कहानी लिख रहा है। कुचलाचाटी प्राथमिक विद्यालय के आंगन में जब नन्हे हाथों ने मिट्टी को छुआ, तो धरती मां की गोद जैसे मुस्कुरा उठी। हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू घुली, पत्तों ने कानों में फुसफुसाया – “देखो, ये हैं हमारे नए रक्षक!”

भवानीप्रसाद दास, जिनकी आँखों में हरियाली का सपना झिलमिलाता है, ने इस कार्यक्रम को एक त्यौहार में बदल दिया। उन्होंने न केवल विद्यार्थियों को पौधे सौंपे, बल्कि उनमें प्रकृति के प्रति प्रेम का बीज भी बो दिया।

बच्चों की मासूम हँसी और पौधों की कोमल पत्तियाँ जैसे साथ-साथ बढ़ने का वादा कर रही थीं। प्रधानाध्यापिका तनुश्री दास, जिनकी कर्मनिष्ठा ने इस विद्यालय को एक सौंदर्य उपवन बना दिया है, 2025 के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सुशोभित हो चुकी हैं।

उन्होंने शिक्षा को किताबों की चारदीवारी से निकालकर पेड़ों की छाँव में बिठा दिया है, जहाँ हर पाठ प्रकृति की गोद में जन्म लेता है। इस पर्व की जड़ें दूर हुगली तक फैली हैं, जहाँ आरामबाग हाइ स्कूल के लोकप्रिय प्रधानाध्यापक विकास चंद्र राय जैसे शिक्षकों की प्रेरणा हर दिशा में हरियाली की लहर भेज रही है।

पश्चिम बंगाल की इस धरती पर कुचलाचाटी विद्यालय एक ऐसा दीपक बन गया है, जिसकी लौ से शिक्षा भी हरियाली में रंग गई है।

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