नोएडा। समकालीन भारतीय कला के विविध आयामों को प्रस्तुत करती समूह प्रदर्शनी “एब्स्ट्राक्ट डायलॉग” इन दिनों स्तूपा–18 आर्ट गैलरी, नोएडा में प्रदर्शित की गयी है, जो 30 मार्च 2026 तक दर्शकों के अवलोकनार्थ खुली रहेगी।
इस प्रदर्शनी में तीन समकालीन कलाकार- नई दिल्ली की रश्मि खुराना, बनारस के अपूर्व और मथुरा की रजनी आर्या की कृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं, जो अमूर्त कला के माध्यम से अपने विशिष्ट सौंदर्य-बोध और वैचारिक संवेदनाओं को सामने लाती हैं।
कला समीक्षक की दृष्टि से निजी आर्ट गैलरियाँ केवल प्रदर्शनी-स्थल नहीं, बल्कि समकालीन कला-संवाद के सक्रिय केंद्र होती हैं। वे कलाकार, दर्शक और संग्राहक के बीच एक जीवंत सेतु निर्मित करती हैं, जहाँ रचना केवल देखी नहीं जाती, बल्कि उसकी व्याख्या, विमर्श और आलोचनात्मक मूल्यांकन भी संभव होता है।
उभरते कलाकारों को मंच, पहचान और कला-बाजार से जोड़ने में इन गैलरियों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है, जिससे नई प्रतिभाओं को सामने आने का अवसर मिलता है और कला-परिदृश्य निरंतर गतिशील बना रहता है।
इसी संदर्भ में स्तूपा-18 गैलरी एक सशक्त उदाहरण के रूप में उभरती है। वर्ष 2010 में कला संग्राहक महेश बंसल द्वारा स्थापित यह गैलरी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में समकालीन और पारंपरिक भारतीय कला को समर्पित एक सक्रिय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित हुई है।
नोएडा स्थित यह गैलरी पेंटिंग, मूर्तिकला और मिश्रित माध्यम की कृतियों के माध्यम से कला-प्रेमियों, संग्राहकों और दर्शकों को रचनात्मक संवाद का अवसर प्रदान करती है।
गैलरी का उद्देश्य कला को व्यापक दर्शक वर्ग के लिए सुलभ और सार्थक बनाना तथा नवाचार और सांस्कृतिक विरासत के बीच संतुलित संवाद स्थापित करना है।
गैलरी के संस्थापक महेश बंसल की परिकल्पना प्रारंभ से ही कलाकारों को उनके करियर के विभिन्न चरणों में सहयोग देने की रही है। उनके मार्गदर्शन में गैलरी ने कई स्थापित और उभरते कलाकारों की कृतियों को प्रदर्शित और संग्रहित किया है, जो इसकी समावेशी और प्रोत्साहनकारी दृष्टि को दर्शाता है।
गैलरी की प्रदर्शनी- परियोजनाएँ साहसिक अमूर्त रचनाओं से लेकर अभिव्यक्तिपूर्ण आकृतिमूलक कार्यों तक फैली हुई हैं, जिनके माध्यम से भारत की समृद्ध कलात्मक परंपरा और उसके विकसित होते वर्तमान के बीच एक सशक्त सेतु निर्मित होता है।
कला समीक्षक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने भी इस प्रदर्शनी में शामिल तीनों कलाकारों की कृतियों पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त करते हुए उनकी कलाभाषा, सौंदर्यबोध और वैचारिक संवेदनाओं का विश्लेषणात्मक लेखन किया है, जो इस प्रदर्शनी के कलात्मक संदर्भ को और अधिक समृद्ध बनाता है।
प्रदर्शनी में शामिल कलाकार रश्मि खुराना की अमूर्त पेंटिंग्स में रंगों की तीव्रता, ऊर्जा और गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। मोटे और गाढ़े रंगों की परतों से निर्मित उनकी सतहें चित्रों में बनावट और संवेदनात्मक प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
लाल, नीले, बैंगनी और काले रंगों का संयोजन जीवन-शक्ति, संघर्ष, रहस्य और मानसिक गहराई को व्यक्त करता है, जबकि सफेद, पीले और हरे रंग आशा और संतुलन का संकेत देते हैं। उनके लिए चित्रकला केवल माध्यम नहीं, बल्कि एक सतत आंतरिक अनुभूति है।
बनारस के युवा कलाकार अपूर्व की कला मानवीय भावनाओं, अमूर्तन और आध्यात्मिकता के अंतर्संबंधों की खोज करती है। उनकी श्रृंखला “मेटाफर ऑफ लाइफ” मानवीय स्मृतियों और अनुभवों के संचयन को बहुस्तरीय परतों और मिश्रित माध्यमों के माध्यम से दृश्य रूप देती है। उनके कार्यों में रंगों और रूपों के बीच संतुलित संवाद दिखाई देता है, जहाँ रेखाएँ केवल सीमाएँ नहीं, बल्कि गतिशील प्रवाह बनकर उभरती हैं।
वहीं मथुरा की कलाकार रजनी आर्या अपनी कृतियों में कॉपर शीट और मेटल वायर जैसे औद्योगिक माध्यमों का प्रयोग करते हुए स्मृति, समय और पहचान के गहरे प्रश्नों को सामने लाती हैं। उनकी परतदार संरचनाओं में ठोस और रिक्त स्थान का सूक्ष्म संवाद दिखाई देता है, जो दर्शक को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है। उनकी कृतियाँ धातु को संवेदनात्मक अनुभव में रूपांतरित करते हुए समय, क्षरण और स्मृति की गहन सौंदर्य- संभावनाओं को उद्घाटित करती हैं।
कुल मिलाकर “एब्स्ट्राक्ट डायलॉग” प्रदर्शनी समकालीन अमूर्त कला की विविध अभिव्यक्तियों का एक सार्थक संगम प्रस्तुत करती है, जहाँ तीनों कलाकार अपनी-अपनी दृष्टि से जीवन, स्मृति और अनुभव के जटिल आयामों को दृश्य रूप देते हैं। यह प्रदर्शनी दर्शकों को कला के साथ गहरे संवाद का अवसर प्रदान करती है और समकालीन भारतीय कला की जीवंतता का सशक्त परिचय कराती है।
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