कोलकाता। महानगर के कान्यकुब्ज भवन में विगत संध्या साहित्य, संस्कृति और उल्लास का एक अनूठा संगम देखने को मिला। ‘केवल काव्य परिवार (पश्चिम बंग ईकाई)’ एवं ‘हिन्दी साहित्य अकादमी (कोलकाता संभाग)’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस ‘मासिक काव्य गोष्ठी’ ने होली की चपलता और रामनवमी की मर्यादा को अपने शब्दों में पिरोया।
मंच की गरिमा और कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात कवि जय कुमार ‘रुसवा’ ने की। मुख्य अतिथि के रूप में राजेंद्र द्विवेदी की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों के रूप में मंच पर चित्रा रॉय ‘श्रीकृष्णवी’, ललिता जोशी, दयाशंकर मिश्र एवं हीरालाल जायसवाल सुशोभित हुए।
कार्यक्रम का मंगलारंभ चित्रा रॉय ‘श्रीकृष्णवी’ द्वारा प्रस्तुत मधुर ‘सरस्वती वंदना’ से हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
गोष्ठी में कवियों ने अपनी लेखनी से श्रृंगार, भक्ति और समसामयिक विषयों के विविध रंग बिखेरे। मंचस्थ सभी महानुभावों के अतिरिक्त काव्य पाठ करने वाले रचनाकारों में प्रमुख थे मानस कुमार, चंद्रकिशोर चौधरी, कृष्ण कुमार दुबे, वंदना पाठक, रीमा पांडे, सविता पोद्दार,
मीतू कनोडिया, डाॅ. दिव्या प्रसाद, रामनारायण झा ‘देहाती’, पुनीत अग्रवाल, चंद्रिका प्रसाद पांडे ‘अनुरागी’, रमाकांत सिन्हा ‘सुजीत’, हीरालाल साव, सुरेन्द्र सिंह एवं विश्वजीत शर्मा ‘सागर’। इन सभी कवियों और कवयित्रियों की रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस साहित्यिक अनुष्ठान का अत्यंत प्रभावी और सारगर्भित संचालन श्री कमल पुरोहित ‘अपरिचित’ ने किया। कार्यक्रम की सफलता के पीछे दयाशंकर मिश्र, रमाकांत सिन्हा एवं विश्वजीत शर्मा ‘सागर’ का सुव्यवस्थित संयोजन रहा।
अंत में, पुनीत अग्रवाल ने उपस्थित सभी अतिथियों, रचनाकारों और सुधी श्रोताओं के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित किया। गोष्ठी के पश्चात सभी ने अल्पाहार के साथ पारंपरिक ‘ठंडाई’ का आनंद लिया, जिसकी व्यवस्था और स्वाद की सभी अतिथियों ने सराहना की।
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