।।राष्ट्र की रीढ़ का दर्द।।
जागो युवाओं, बुलंद अपनी आवाज करो
राष्ट्र की युवा शक्ति के नाम एक विनम्र पुकार
सुनो, हे राष्ट्रनिर्माताओं!
यह कैसी व्यवस्था का खेल है,
जो युवाओं के भविष्य से खेल रहे हैं,
उनके सपनों को पल-पल कुचल रहे हैं।
कहीं पेपर लीक, कहीं परीक्षा रद्द,
कहीं वर्षों तक भर्ती अधर में पड़ी।
कहीं परिणाम की अनंत प्रतीक्षा,
कहीं नियुक्ति की कोई घड़ी नहीं।
मैं भी उसी भीड़ का एक युवा हूँ,
जो रातभर ट्रेन में धक्के खाकर,
स्टेशन की बेंचों और प्लेटफ़ॉर्म की ठंडी फर्श पर
एक नई सुबह का इंतजार करता है।
भूख, प्यास, गर्मी, सर्दी और थकान सहकर,
किसी तरह परीक्षा केंद्र तक पहुँचता है।
परीक्षा देकर लौट ही रहा था,
कि रास्ते में एक खबर मिली
पेपर लीक हो गया!
उस क्षण लगा,
जैसे केवल प्रश्नपत्र नहीं,
मेरी वर्षों की मेहनत लीक हो गई।
मेरे माता-पिता का विश्वास लीक हो गया।
मेरे सपनों का भविष्य लीक हो गया।
किसी माँ ने अपने गहने बेचे,
किसी पिता ने खेत गिरवी रख दिए।
किसी बहन ने अपनी इच्छाएँ त्याग दीं,
किसी भाई ने अपनी जवानी किताबों को सौंप दी।
सिर्फ़ इसलिए कि
घर का एक बच्चा
ईमानदारी से अपना भविष्य बना सके।
हम जानते हैं
हर युवा को सरकारी नौकरी मिलना संभव नहीं।
पर जो भर्तियाँ निकलती हैं,
कम-से-कम उन्हें तो निष्पक्ष और पारदर्शी होने दीजिए।
पेपर लीक मत होने दीजिए।
मेहनत को बेईमानी से हारने मत दीजिए।
आखिर क्यों युवाओं का सम्मान नहीं?
क्या उनके सपनों का कोई मूल्य नहीं?
क्या वर्षों की तपस्या का यही पुरस्कार है,
कि ईमानदारी हार जाए
और बेईमानी जीत जाए?
जब प्रश्नपत्र बाजारों में बिकते हैं,
तब केवल कागज नहीं बिकते।
बिक जाती है वर्षों की तपस्या,
बिक जाता है गरीब का विश्वास,
और घायल हो जाता है राष्ट्र का भविष्य।
आज कितने युवा निराशा में टूट रहे हैं,
कितने अपने सपनों से बिछड़ रहे हैं।
कुछ संघर्ष करते रहते हैं,
कुछ जीवन से ही हार जाते हैं।
हर ऐसी घटना केवल एक परिवार का दुख नहीं,
पूरे राष्ट्र की पीड़ा बन जाती है।
युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ हैं।
युवा केवल आज नहीं,
भारत का आने वाला कल हैं।
यदि राष्ट्र की रीढ़ ही कमज़ोर कर दी जाएगी,
तो विश्वगुरु बनने का स्वप्न
कैसे साकार होगा?
हे देश के नीति-निर्माताओं,
हे शासन और प्रशासन के कर्णधारों,
आपसे हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन है
देश के हर उस परिवार के बच्चों की
वर्षों की तपस्या व्यर्थ मत जाने दीजिए,
जिनके सपने केवल मेहनत के सहारे पलते हैं।
समय पर परीक्षाएँ कराइए।
समय पर परिणाम दीजिए।
समय पर नियुक्तियाँ कीजिए।
पेपर लीक पर कठोर और प्रभावी रोक लगाइए।
योग्यता को उसका सम्मान दिलाइए।
हम दया नहीं माँगते।
हम विशेषाधिकार नहीं माँगते।
हम केवल इतना चाहते हैं-
ईमानदार परिश्रम करने वाले को
ईमानदार अवसर मिले।
याद रखिए
जब एक युवा हारता है,
तो केवल एक व्यक्ति नहीं हारता।
हार जाता है एक परिवार,
कमजोर हो जाता है समाज,
और पीछे छूट जाता है राष्ट्र।
भ्रष्टाचार केवल धन की चोरी नहीं,
यह विश्वास की चोरी है।
यह सपनों की चोरी है।
यह भारत के भविष्य की चोरी है।
आओ युवाओं!
क्रोध को चरित्र में बदलो।
निराशा को संकल्प में बदलो।
संघर्ष को शक्ति में बदलो।
कलम को अपनी आवाज बनाओ।
ज्ञान को अपना अस्त्र बनाओ।
संविधान को अपना पथ बनाओ।
सत्य को अपना साहस बनाओ।
जागो युवाओं, बुलंद अपनी आवाज करो।
अपने अधिकारों का सम्मान करो।
न हिंसा का मार्ग अपनाओ,
न घृणा का प्रचार करो।
लोकतांत्रिक और संवैधानिक मार्ग पर चलकर
न्याय, पारदर्शिता और ईमानदारी की माँग करो।
पेपर लीक रुके।
भर्ती समय पर हो।
परीक्षा निष्पक्ष हो।
योग्यता का सम्मान हो।
हर युवा के चेहरे पर विश्वास हो।
युवा बचेगा,
तो सपना बचेगा।
सपना बचेगा,
तो भारत आगे बढ़ेगा।
तभी सशक्त होगा भारत।
तभी समृद्ध होगा भारत।
तभी न्यायपूर्ण होगा भारत।
और तभी साकार होगा
विश्वगुरु भारत का स्वप्न।
जय हिन्द!
जय भारत!
डॉ. विक्रम चौरसिया
(स्वरचित एवं मौलिक रचना)
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