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भारतीय सांकेतिक भाषाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का आंदोलन – ‘द राइट साइन’ शुरू

मुंबई (अनिल बेदाग): भारत के सबसे बड़े लोकल लैंगवेज टेक्नोलॉजी प्लेटफार्म साइनिंग हैंड्स फाउंडेशन, देश में बधिरों के लिए समर्पित सबसे बड़े न्यूज़ एवं एंटरटेनमेंट चैनल वंडरलैब तथा ल्युसिफर म्युज़िक ने मिलकर एक शानदार पहल – ‘द राइट साइन’ की घोषणा की है।

यह पहल इंडियन साइन लैंगवेज (आईएसएल)/भारतीय सांकेतिक भाषा) के लिए केवल एक रचनात्मक कैम्पेन न होकर इसे सार्थक तरीके से समावेशी बनाने के लिए सामाजिक आंदोलन में बदलेगी।

इस पहल के अंतर्गत, इंदीप बख्शी, वी-टाउन क्रोनिकल्स, एन्कोर, और य-श 1हन्ड समेत अन्य कई जाने माने भारतीय रैपर्स ने मिलकर अपने म्युज़िक वीडियो – क्रमशः एलोन, फ्लेक्स, ढलता चांद और जो देखा वो लिखा को नए सिरे से रिलीज़ किया है, और इसमें पारंपरिक गैंग संकेतों/इशारों के स्थान पर सार्थक आईएसएल अभिव्यक्तियों को शामिल किया गया है।

इस कैम्पेन के तहत, इन रैपर्स् ने 40 जरूरी वाक्यांशों (फ्रेज़) वाला एक ट्यूटोरियल भी जारी किया गया है, जो लाखों लोगों को बधिरों के साथ अधिक कुशल तरीके से कम्युनिकेट करने में मददगार करेगा।

इस पहल का एक और बड़ा फायदा यह है कि इसने अन्य कलाकारों एवं क्रिएटर्स को भी अपनी परफॉरमेंस में सांकेतिक भाषा को शामिल करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे आईएसएल को बड़े पैमाने पर स्वीकृत कम्युनिकेशन टूल के रूप में स्वीकृति दिलाने में मदद मिलेगी।

इस कैम्पेन का रचनात्मक पक्ष वंडरलैब ने संभाला है और ल्युसिफ़र म्युज़िक ने संगीत से इसे संवारा है, यह कैम्पेन म्युज़िक और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की ताकत का मेल कराते हुए एक्सेसिबिलिटी और समावेशिता के लिए देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का इरादा रखता है।

इसके मूल में, ‘द राइट साइन’ है जो आईएसएल को मुख्यधारा की संस्कृति का हिस्सा बनाना चाहता है ताकि देशभर में बधिरों के लिए मौजूद कम्युनिकेशन की बाधाएं दूर हो सकें।

समीर वोरा, चीफ मार्केटिंग ऑफिसर, वर्से इनोवेशन ने कहा, “हमने ‘द राइट साइन’ को एक कैम्पेन से कहीं अधिक महत्व देते हुए पेश किया है, यह बुनियादी समावेशिता पर ज़ोर देता है और समाज में व्याप्त दूरियों को मिटाने के लिए इसमें सांस्कृतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया गया है।

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हमारा प्लेटफार्म प्रतिदिन लाखों लोगों तक पहुंचता है, और हम इस कैम्पेन को एक ऐसे ताकतवर अवसर के तौर पर देखते हैं जो सांकेतिक भाषा को सामान्य बनाएगा और इसे पॉप कल्चर से भी जोड़ेगा।

यह हमारी प्रतिबद्धता की शुरुआत भर है, और हम पूरे इकोसिस्टम से जुड़े अन्य पक्षों को भी इस रूपांतरण वाले सफर से जुड़ने के लिए आमंत्रित करते हैं।

‘द राइट साइन’ से वर्से इनोवेशन के समावेशी डिजिटल इकोसिस्टम्स का निर्माण करने की व्यापक प्रतिबद्धता झलकती है जो देशभर में विविध समुदायों के लिए मददगार साबित होगी।”

आलोक केजरीवाल, संस्थान एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, साइनिंग हैंड्स फाउंडेशन ने कहा, “साइन लैंगवेज केवल एक संचार का माध्यम ही नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, पहचान और उन बुनियादी अधिकारों को भी प्रतिनिधित्व करती है जिन्हें पहचान मिलनी चाहिए।

वर्से इनोवेशन की यह पहल इसी दिशा में हमारी कम्युनिटी के लिए उठाया गया कदम है। वर्से की डिजिटल पहुंच का इस्तेमाल करते हुए ‘द राइट साइन’ जागरूकता को एक्शन में बदलेगा।

बधिर समुदाय को आईएसएल को अपनाने के लिए सशक्त बनाते हुए, वर्से ने उन्हें न सिर्फ भारतीय समुदाय की मुख्यधारा में समावेशित करने का प्रयास किया है बल्कि इस बारे में हमारे विचारों को भी नए सिरे से परिभाषित किया है।”

अमित अकाली, सह-संस्थापक एवं मुख्य रचनात्मक अधिकारी (सीसीओ), वंडरलैब ने कैम्पेन के बारे में कहा, “इस कैम्पेन का विचार रैपर्स द्वारा उन गैग संकेतों के बारे में सांस्कृतिक समझ के इर्द-गिर्द पैदा हुआ जिसकी भारत में कोई प्रासंगिकता नहीं है और युवा उसकी नकल करते हैं, जबकि संकेत भाषा को भारत में अधिकांश लोग समझते हैं।

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इसीलिए हमने रैप को चुना है क्योंकि मनोरंजन दरअसल, शिक्षित करने का सर्वोत्तम माध्यम भी है, खासतौर पर तब जबकि हमारा मिशन भारत को संकेत भाषा सिखाना है।

ल्युसिफर म्युज़िक ने कहा, “ल्युसिफर म्युज़िक में, हमारा हमेशा से मानना रहा है कि संगीत हर तरह की सीमाओं से पार जाता है – यह भाषाओं, क्षमताओं और पहचान की दीवारों को लांघता है।

एन्कोर ने कहा, “जब मैंने पहली बार ’द राइट साइन’ के बारे में सुना, तो मैं तुरंत इससे प्रभावित हुआ। हमारे पास यह अवसर था कि हम संकेतों को अपने वीडियो में एक सार्थक संचार के रूप में शामिल करें और समुदायों के बीच व्याप्त दूरियों को मिटाएं।

अस्तरिफ – वी टाउन क्रोनिकल्स ने कहा, “रैप का इस्तेमाल कर, जो कि असल हो और सीधे स्ट्रीट से उठाया गया था, सांकेतिक भाषा को मुख्यधारा में शामिल करना मेरे लिए आंखे खोलने देने वाला अनुभव था।

हम वीडियो में हमेशा ही संकेतों को शामिल करते हैं, लेकिन यह पहला अवसर है जबकि इन संकेतों के वास्तव में, कुछ मायने हैं, असल मायने यही हैं। संगीत एक विशुद्ध भावना की तरह होता है, और सांकेतिक भाषा ने उस अभिव्यक्ति को नया आयाम दिया है।

अब समय आ चुका है कि हम आईएसएल को हर जगह सामान्य रूप से लें, खासतौर से युवा संस्कृतिक में तो ऐसा होना ही चाहिए। यह आंदोलन केवल समावेशिता पर केंद्रित नहीं है, बल्कि रूपांतरण करने और बदलाव लाने वाला भी है।”

यह सहयोगात्मक कैम्पेन अभिव्यक्ति और समावेशिता का उत्सव है, जो देशभर में लोगों को भारतीय सांकेतिक भाषा के जरिए परस्पर जुड़ने, और सशक्त बनने को प्रेरित करता है।

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