IMG 20251205 WA0032

प्रकृति के सुमधुर गीतों में छात्रों की यात्रा : दीघा के स्वर्ण तटों पर ज्ञान की उमंग

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। समुद्र की अमृत कुंडली के तट पर, जहां नील गगन अपने असीम जल से मिलकर हृदय को स्फूर्ति का स्पंदन देते हैं, वहीं तमलुक उत्तर चक्र के पदुमबसान हराधन प्राथमिक विद्यालय के मणि-विद्यार्थी प्रकृति के अनमोल रहस्यों को समझने निकले। दीघा की कोमल तटरेखा ने जैसे अपनी चाँदी सी बालू के गालों पर उनकी कदमों के निशान सजाए और समुद्र की शीतल वायु ने उनके मन के पंखों को उड़ान दी।

समंदर की लहरों में छिपे जीव-जंतुओं की कला, पेड़ों-पौधों की हरित माला, और भू-आकृति की विवेचना ने ज्ञान के अनमोल मोती बांटने वाले गुरुजी-गुरुमाताओं के साथ मिलकर एक जीवंत पाठशाला बनाई। छात्रों ने जैसे सागर की गहराइयों में छिपे रत्नों को अपनी आत्मा की पिटारी में संजो लिया।

मरीन एक्वेरियम में तूफानी जल के नृत्यरत प्राणियों से परिचय हुआ और मृत ब्राइड्स व्हेल की विराट कंकाल ने उन्हें प्रकृति के विराट इतिहास की कथा सुनाई। विद्यालय के मानसरोवर में छात्रों ने दीघा तट से संग्रहीत मोती-सी सामग्रियों को सुरक्षित करते हुए, ज्ञान के खजाने के संरक्षक बनने की शपथ ली।

छोटे-छोटे दीपक जैसे असीम पात्र, पौलमी घोड़ाई, प्रत्युष चौधरी एवं अन्य छात्र-छात्राएं, सुरम्य समुद्र की गहराइयों में विचरती व्हेल की विशालता और उसकी गाथा देखकर हर्षित हुए। गुरु-शिक्षिकाओं के मुख से बहता ज्ञान जलधारा की भांति प्रवहमान था, जो शुष्क ग्रंथों की सीमाओं को तोड़कर जीवंत अनुभव की नदी में परिवर्तित हो गया।

हर वर्ष इस प्रकृति-कथा के माध्यम से, वे विद्यार्थी अपनी मन की पंखुड़ियों पर ज्ञान की ओस पाकर उन्नति की ओर उड़ान भरते हैं। दीघा साइंस सेंटर, जगन्नाथ मंदिर, बालियाड़ी, अमरबत्ती पार्क और सपनों की छांव में बसे दीघा बीच के रोमांच से पहली बार साक्षात्कार करते बालमन, जैसे प्रकृति की कोमल मूरतों को सजीव चित्रों में देख रहे हों।

यह यात्रा केवल शिक्षा का सफर नहीं, बल्कि प्रकृति के अनमोल गीतों से सराबोर आत्मा की खोज थी, जहां हर पास जड़ता से उठकर जीवन की नूतन ऊर्जा से अभिषिक्त हुआ।

दीघा की स्वर्णिम छाँव तले, छात्र-विद्यार्थी असीम पात्र, पौलमी घोड़ाई, प्रत्युष चौधरी, प्रेरणा बेरा, देवर्चना दुआरी, प्रिया बेरा, सायंतिका बेरा, सोमनाथ धड़ारा जैसे ज्ञान के अनमोल मोती, समुद्र की गहराइयों में छिपी व्हेल की विशाल आकृति देखकर उल्लसित हुए।

गुरु-शिक्षिका कलामंदिर की दीपिकाएँ कृष्णा बेरा धाड़ा, पापिया पाल जाना, पुतुल माइति पाखिरा, शिवानी मालाकार मंडल, शंपी बेरा दास, मधुमिता चौधरी मंडल और तमसा दास मेट्या – जिन्होंने जीवित प्रकृति के साथ मिलकर बच्चों के हृदयों में विद्या और प्रेम के बीज बोए, जिन्हें देखकर ज्ञान के सागर के द्वीप खिल उठे।

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

20 − nine =