भारतीय व्यंजनो की एक झलक : कड़ी 5 (उत्तर – पूर्वी भारतीय राज्य)

फोटो साभार : गुगल

(उत्तर – पूर्वी भारतीय राज्य)

बद्रीनाथ साव, कोलकाता । भारतीय व्यंजनों की एक झलक श्रृंखला के कड़ी 4 के बाद अब बारी है अंतिम कड़ी 5 की जिसमे मैं आपको उत्तर – पूर्वी भारतीय राज्यों की परम्परागत खान-पान से अवगत कराने की कोशिश करूँगा।

28. आसाम : उत्तर – पूर्वी राज्यों की सूची में शुरुआत आसाम से करते हुए मैं यह बताना चाहूंगा की यह राज्य पहाड़ी क्षेत्रो में बसे होने के कारण यहां के खानपान को असमिया खानपान के रूप में जाना जाता है। यह पहाड़ों में विभिन्न प्रकार से खाना पकाने के संगम की एक शैली है। आसाम के लोगो का मुख्य व्यंजन है- डक मीट करी, मसूर टेंगा, आलू पिटिका, शाक आरु भाजी, ओऊ टेंगा, परोर मांगसो, सिल्कवर्म, बांगाझोर लगोट कुकुरा इत्यादि। तो अगर आप आसाम पहुँचते है, तो असमिया खाने से रूबरू हुए बिना मत लौटिएगा।

29. अरुणाचल प्रदेश : आसाम से होते हुए अरुणाचल प्रदेश की शिखरों तक अगर आप पहुँचते हैं, तो चाइनीज़ खाने की कुछ झलक भले दिख जाय लेकिन स्वाद तो अरुणाचलियों के भारतीय व्यंजनों से ही परिपूर्ण होगा। यहां के लोग मुख्यतः जिन व्यंजनों के लिए जाने जाते हैं- वो है बम्बू शूट, पिका पीला, लुक्टेर, पेहक, अपोंग, मरुआ, चूरा सब्जी, डुंग पो इत्यादि।

30. नागालैंड : अरुणाचल प्रदेश से वापसी के दौरान आप बड़ी सहजता से नागालैंड में प्रवेश कर वहाँ के लोगो का अभिवादन स्वीकार करते हुए उनके बीच कुछ दिन ठहर सकते है। अगर आपने ऐसा किया तो आपके जुबान को वहाँ का स्वादिष्ट भोजन खाने को मिलेगा जो सामान्यत नागा फ़ूड के तौर पर जाना जाता है जिनमे स्मोक्ड पोरकेड इन अखुनि, हिनकेजवु, अमरसु, गल्हो, यकीनी चोकीबो, फिश इन बम्बू, जुठो इत्यादि जैसे व्यंजन आते है। हालंकि यहां के व्यंजनों में मांसहार की अधिकता है जिनमे सुवर से लेकर कुत्ते तक यहां के लोग खाते है। लेकिन इसके अलावा आपको शाकाहारी व्यंजन भी उपलब्ध मिलेंगे जो देश के अन्य राज्यों के लोगो द्वारा खाये जाते हैं।

31. मेघालय : नागालैंड के बाद आप मेघ के आश्रय में आच्छादित मेघालय की खूबसूरत वादियों की भी सैर पर निकल सकते हैं और सैर के दौरान थक-हार के भूख लगे तो आप वहाँ के लोगो के हाथो से बनी हुई वहाँ के प्रसिद्ध व्यंजनों का लुफ्त भी उठा सकते है। व्यंजनों की सूची कुछ इस प्रकार है, जोदोह, नखम बिटची, दोहकलेह, पुमालोई इत्यादि

32. सिक्किम : मेघालय के मन लुभावन वादियों की यादों के साथ आप सिक्किम पहुँच चुके है, जहां के खान-पान में आपको समीपवर्ती देशों जैसे की भूटान, नेपाल, तिब्बत के व्यंजनों का एक मिश्रण देखने को मिलेगा। ये सारे व्यंजन बहुत ही स्वादिष्ट होते है जो आपकी जुबान पर हमेशा के लिए घर बना लेते है। यहां के व्यंजनों की तालिका कुछ इस प्रकार है सेल रोटी, छुरपि सूप, ढिँडो, गुन्द्रुक, कोडो की रोटी, किनेमा करी इत्यादि।

33. मणिपुर : सिक्किम से वापसी करते हुए हम अब मणिपुर पहुँच चुके हैं। मणिपुर अपने सांस्कृतिक स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां के धार्मिक स्थल सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र हमेशा ही रहे है, छोटे से इस राज्य की विशेषताएं कई है जिनमे यहां के पकवान भी है जो देश भर में अपनी एक अलग पहचान बनाते है। यहां के व्यंजनों में प्रमुख रूप से चम्थोंग और कांगशूई, एरोम्बा, मोरोक मेटपा, सिंगजु, पाकनाम, चाक हाओ खीर, आलू कांग्मेट, नगा थोंगबा खाये जाते हैं।

34. मिजोरम : मणिपुर से सटे हुए राज्य मिजोरम तक पहुँचते ही कोट पीठा, मीसा माछ पूड़ा, पांच फोरोन तोरकारी, मिज़ो वकसा, छुम हान, बाई, बम्बू शूट फ्राई जैसे व्यंजन अपनी खुशबु का जादू फ़ैलाने लगते है, जिन्हे अनदेखा करते हुए आप कतई भी आगे बढ़ने का मन नहीं बना पाएंगे।

35. त्रिपुरा : दोस्तों मैं अब इस भारतीय व्यंजनों की एक झलक यात्रा के आखरी पड़ाव में पहुँच चूका हूँ, जहां पर मैं आपको त्रिपुरा की खूबसूरत गलियों से होते हुए वहाँ की स्वाद भरे भोजनो की एक तालिका प्रस्तुत करूँगा और अपनी इस यात्रा को विराम दूंगा। त्रिपुरा के लोगो द्वारा प्रमुख रूप से मुई बोरोक, चौक और चुवारक, भंगुई, कोसोइ बुटवी, मुया बाई वहाँ चख्वी जैसे व्यंजनों का सेवन किया जाता है।

तो दोस्तों ये थी मेरी श्रृंखला भारतीय व्यंजनों की एक झलक जिसमे मैंने भारत के सभी राज्यों जिनमे केंद्र-शासित राज्य भी है, उनको उल्लेख करते हुए वहाँ के प्रमुख व्यंजनों को दर्शाने की कोशिश की है। हालांकि ये मात्र झलक है, विस्तार नहीं पर उम्मीद करता हूँ कि आप सबको पसंद आया होगा और व्यंजनों का नाम सुनते ही आप सबके मुँह में पानी उतर आया होगा और अगर ऐसा है, तो इंतज़ार किस बात का टिप्पणियों में बताएं कि आप किस-किस राज्य में घूम चुके है और कौन-कौन से व्यंजन आपके पसंदीदा तालिका में अबतक जगह बना चुकी हैं। किसी प्रकार की त्रुटि के लिए क्षमाप्राथी रहूँगा, धन्यवाद

बद्रीनाथ साव
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