नई दिल्ली । सफलता की कुंजी खुद ही कहती भी है न कि साहसी बनो, भाग्य भी साहसी व्यक्ति का ही साथ देता है जो सभी को साथ लेकर चलते है, लोगों के सुख-दुख का ध्यान रखते है, ऐसे व्यक्ति अच्छा नेतृत्वकर्ता होता है व जीवन में बहुत ही बड़ी सफलता प्राप्त करते है।देखिए न इस संसार में अलग-अलग विचारो के लोग रहते हैं, कुछ लोग तो हमेशा अपने संसाधनों का रोना रोते रहते हैं, उन्हे हर चीज से ही शिकायत रहती है, अक्सर देखा गया है की ऐसे ही लोगों को हमेशा अफसोस होता रहता है कि काश वो किसी दौलतमंद के यहां पैदा होते, जीवन के सभी सुख-सुविधाओं का उपभोग करते।

अब आप ही सोचो यह कितनी खराब सोच है, ऐसे ही लोग भूल जाते हैं कि सभी दौलतमंद भी कभी सामान्य आदमी ही थे, उन्होंने या उनके पूर्वजों ने कड़ी परिश्रम व साहस के बल से ही यह मुकाम हासिल किया है। याद रहे जिसके भीतर साहस है वह व्यक्ति ही सफल होता है, साहसी व्यक्ति चुनौती स्वीकार करता है, निर्भीकता से हर तरह की कठिनाइयों पर विजय पाता है, एक साहसी व्यक्ति कांटो भरे पथ पर चलने के लिए हमेशा तत्पर रहता है, डर क्या होता है एक साहसी व्यक्ति जानता ही नहीं है।

कही पढ़ा था कि जो व्यक्ति जीवन में ज्यादा खतरे नहीं उठाता वह एक साधारण जिंदगी जीने से ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है, मेरा यहां कहने का मतलब है कि अगर आपने जीवन में साहस नहीं दिखाया तो निश्चित है कि आप कुछ भी उल्लेखनीय नहीं कर सकते है, साहस ही एक ऐसा मानवीय गुण है जो व्यक्ति की सफलता की संभावना को बहुत ही बड़ी मात्रा में बढ़ा देता है, साहसी व्यक्ति जो एक बार निर्णय ले लेता है उस पर ही अडिग रहता है भले ही कितनी बड़ी कठिनाइयों का सामना क्यों न करना पड़े।

अक्सर ही देखा गया है कि लोग किसी विचार को धरातल पर उतारने से पहले ही अन्य लोग क्या कहेंगे, कहीं कोई हंस न दे, जैसे ही कारणों के चलते अपना मनोबल कम कर लेते हैं और जल्द ही उस लक्ष्य को भी छोड़ देते है, ऐसे लोग ही अक्सर इस दुनियां में आते हैं अपना समय पूरा करते हैं और गुमनामी की मौत मरकर भुला दिए जाते हैं। वास्तव में मेरे आत्मीय साथियों देखे तो लिक तोड़ना, परंपरागत नियमों की अवहेलना करके अपना खुद का रास्ता बनाना आसान काम नहीं है।

देखे तो साहसी लोग ही परिणाम के बारे में विचार किए बिना ही कर्म में लगातार लीन रहते हैं, सकारात्मक व साहसी व्यक्ति अक्सर ही देखा गया है कि असफलता के बारे में सोचते ही नहीं, वह तो अपनी संपूर्ण क्षमता व ऊर्जा अपने लक्ष्य को पाने में लगा देते हैं। इसलिए अंत में यही कहूंगा कि आप भी अपनी असफलताओं को भूल कर आज से ही नए सिरे से प्रयास करना शुरू कीजिए, गीता से शिक्षा लेते हुए फल की इच्छा छोड़कर कर्म करने पर यकीन करते हुए, धीरे धीरे देखना आपका भी समय बदलेगा, साहस के साथ निर्णय लीजिए, एक दिन आप सफलता के सर्वोच्च मंजिल को पा लेंगे।

vikram
डॉ. विक्रम चौरसिया

चिंतक/आईएएस मेंटर/सोशल एक्टिविस्ट/दिल्ली विश्वविद्यालय 

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