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विद्यासागर विश्वविद्यालय में बही काव्य-रस की अविरल धारा

भव्य रूप से सम्पन्न हुआ ‘काँसाई कविता उत्सव–2025’

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। शब्द, संवेदना और सृजन की त्रिवेणी के संगम में विद्यासागर विश्वविद्यालय का प्रांगण साक्षी बना एक अनूठे साहित्यिक उत्सव का। नाव्यस्रोत पत्रिका समूह के सौजन्य से आयोजित ‘काँसाई कविता उत्सव–2025’ अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। इसी अवसर पर साहित्य प्रेमियों के लिए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रकाशित हुआ ‘काँसाई एवं बाघुई’ पत्रिका का वर्ष–7, अंक–7

इस काव्य महोत्सव में कविता-पाठ, साहित्यिक आड्ढा तथा गुणीजन सम्मानना कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। शब्दों की लय, भावनाओं की गहराई और विचारों की निर्भीक अभिव्यक्ति ने पूरे वातावरण को साहित्यिक चेतना से आलोकित कर दिया।

कार्यक्रम में नाव्यस्रोत पत्रिका समूह के अध्यक्ष प्रोफेसर सुधींद्रनाथ बाग, संपादक डॉ. यासीन खान, कोषाध्यक्ष डॉ. सुषांत दे, विद्यासागर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. जयंत किशोर नंदी, लोकसंस्कृति शोधकर्ता डॉ. मधुप दे, प्रख्यात साहित्यकार रोशनआरा खान, अध्यक्षा स्वप्ना घोड़ाई, अध्यापक सुषांत दलोई सहित कुल 122 कवि, साहित्यकार एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

उत्सव का मूल उद्देश्य केवल कविता-पाठ तक सीमित न रहकर, नवोदित कवियों और नवप्रवेशी साहित्यकारों को मंच प्रदान करना, उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना तथा साहित्य की निरंतर बहती धारा को समृद्ध करना रहा। वरिष्ठ और युवा रचनाकारों के संवाद ने इस आयोजन को एक सजीव साहित्यिक प्रयोगशाला में बदल दिया।

कुल मिलाकर, काँसाई कविता उत्सव–2025 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि साहित्यिक चेतना, सृजनशीलता और सांस्कृतिक उत्तराधिकार का उत्सव बनकर उपस्थित हुआ। जहाँ शब्दों ने संवेदना को स्वर दिया और कविता ने समाज से संवाद किया।

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