तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। मेदिनीपुर के ऐतिहासिक शहीद प्रद्योत स्मृति सदन में स्वर अभिलेखन, मेदिनीपुर द्वारा आयोजित वार्षिक सांस्कृतिक अनुष्ठान ‘उत्सारित आलो’ इस वर्ष भी कला, साहित्य और लोक संवेदना के अद्भुत संगम के रूप में सामने आया।
कार्यक्रम में संस्थान के लगभग डेढ़ सौ छात्र-छात्राओं ने विविध विषयों पर आधारित अभिलेखनों का प्रभावशाली कोलाज प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
इस अवसर पर स्वर अभिलेखन के प्रथम उत्पादन के रूप में, कवि सुकांत भट्टाचार्य की जन्मशताब्दी को समर्पित एल्बम ‘शुधुई सुकांत’ का प्रकाशन किया गया। साथ ही, स्वर अभिलेखन के षष्ठ वर्ष के प्रथम अंक ‘दोसर’ पत्रिका का भी विमोचन हुआ।

कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत विषय-आधारित अभिलेखनों में पितार आशीर्वाद, स्मरणे सुकांत, सोनार मेयेरा, म्याव, भोकट्टा, वीर सुभाष, शहीद खुदीराम, बारो मासे तेरो पर्वण, शक्ति रूपिणी मां, नाना देशेर नाना लोक, छड़ार देशे, सुनिर्मल एर छड़ा, भाइफोटा जैसे कोलाज विशेष रूप से प्रशंसित हुए।
अनुष्ठान में उपस्थित प्रमुख अतिथियों में विधायक सुजय हाजरा, सहायक विद्यालय निरीक्षक सौमेन घोष, विश्वेश्वर सरकार, जयंत साहा, सत्य रंजन घोष, पार्थ मुखोपाध्याय, अरूप भुइया एवं स्वस्ति मुखोपाध्याय सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।
कोलकाता की प्रतिष्ठित संस्था बैचित्र्य की ओर से अरिंदम मुखर्जी, सुदीप्ता और अपराजिता ने श्रुति-नाटक प्रस्तुत कर मंच को जीवंत कर दिया। वहीं देश-विदेश में अभिलेखन कला को लेकर सक्रिय कलाकार साम्य कार्फा ने अपने असाधारण छंदबद्ध अभिलेखन से पूरे सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया।
‘दोसर’ पत्रिका का उद्घाटन कवि निर्मलय मुखोपाध्याय ने किया। इस अवसर पर सौमदीप चक्रवर्ती भी उपस्थित थे। साथ ही शुभदीप बसु की चतुर्थ पुस्तक अभिलेखन के स्क्रिप्ट के मुखपृष्ठ का लोकार्पण भी इसी मंच से हुआ।
स्वर अभिलेखन के करणधार शुभदीप बसु ने कहा, “वर्ष की शुरुआत में इस अभिलेखन-अनुष्ठान को शहरवासियों को उपहार स्वरूप प्रस्तुत कर हम अत्यंत प्रसन्न हैं। इस आयोजन में स्वर अभिलेखन के कलाकारों के साथ-साथ विभिन्न संस्थानों के दो सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की सभी के प्रति हम कृतज्ञ हैं।”
कार्यक्रम के दौरान स्वर अभिलेखन के उन कलाकारों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने राष्ट्रीय एवं राज्य-स्तरीय प्रतियोगिताओं में पुरस्कार प्राप्त कर संस्थान का नाम रोशन किया है।
अनुष्ठान का सफल संचालन ईशिता चट्टोपाध्याय एवं शताब्दी गोस्वामी ने किया। सह-संचालन में श्रीजिता घोष और सौरिश दास रहे।
सुपर्णा बनर्जी, सुपर्णा कोले, शिवानी पाल, प्रांजली दास, अरुंधती सेन, माधुश्री घोष, शीला महापात्र, साखी बंदोपाध्याय, मुनमुन दास, अंजना माईती, मिठू कर्मकार, रत्ना मान्ना एवं देवश्री पंडा की प्रस्तुतियों में कवितार देशे, आंचलिक कविता और अनुगल्प विशेष रूप से सराहे गए।
कार्यक्रम के अंत में स्वरलिपि, छंदम, कल्लोल, जागरी, नटराज, रूपकम, नृत्यांजलि, नृतांगना, मल्लार नृतंगन, समिक सिंह तथा स्वर अभिलेखन की ओर से दीपक बोस, दीपा बोस एवं मनीषा बोस को धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
‘उत्सारित आलो’ ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि स्वर, शब्द और संवेदना जब एक मंच पर उतरते हैं, तो संस्कृति केवल प्रस्तुत नहीं होती, वह जीवंत हो उठती है।
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