कोलकाता । बीरभूम हिंसा के बाद भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफा और केंद्रीय एजेंसियों से जांच की मांग की है। वहीं पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक मनोज मालवीय ने बताया कि मामले में अब तक 11 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। जांच के लिए SIT का गठन किया गया। बीरभूम हिंसा में 8 लोग जिंदा जले है और अब तक 23 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। दहशत में पलायन के लिए लोग मजबूर हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के नेता भादू शेख की हत्या के बाद हुई आगजनी में लगभग आठ लोग जिंदा जल गए।

इस मामले में अभी तक 23 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस घटना के बाद बागुटी गांव में दहशत का आलम यह कि पीड़ित परिवार अपने घरों को छोड़कर पलायन कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आगजनी में मृतकों के परिजनों का कहना है कि हम यहां डर के साए में नहीं जी सकते। हमने अपने परिवार के लोगों को खो दिया है। अब हम अपने परिवार के साथ बाहर जा रहे हैं। वहीं इस अग्निकांड की राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने तीन दिनों के भीतर पश्चिम बंगाल पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

वहीं इस घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफा मांगा है और केंद्रीय एजेंसियों से इसकी जांच की मांग की है। इस बीच, पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) मनोज मालवीय ने बताया कि मामले में अब तक 11 गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया है।
दरअसल पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता की हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के कुछ देर बाद ही रामपुरहाट के करीब बागुटी गांव में दर्जन भर झोपड़ियों को आग लगा दी गई। इसमें दो बच्चों और तीन महिलाओं समेत आठ लोगों की जलने से मौत हो गई।

इस घटना के बाद भाजपा ने ममता बनर्जी को इस्तीफा देने और राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। वहीं डीजीपी मनोज मालवीय के अनुसार अब तक कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एडीजी (CID) ज्ञानवंत सिंह के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस घटना में जीवित बचने वालों में से एक ने बताया कि हम सो रहे थे और अचानक धमाकों की आवाज सुनी, इसके बाद हमारे घरों में आग लगा दी गई।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने घटना को भयावह करार देते हुए राज्य के ‘हिंसा एवं अराजकता’ की संस्कृति की गिरफ्त में होने का दावा किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनसे ‘अनुचित बयान देने से बचने’ का आग्रह किया और कहा कि उनके बयानों का राजनीतिक असर होता है, जो सरकार को धमकाने के लिए अन्य राजनीतिक दलों को समर्थन मुहैया कराते हैं। वहीं भाजपा के नौ सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गृहमंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद घटना पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी। गृह मंत्री से मिलने वालों में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष, लॉकेट चटर्जी और अर्जुन सिंह शामिल थे।

डीजीपी मनोज मालवीय ने बताया कि स्थिति अब पूरी तरह से नियंत्रण में है और गांव में एक पुलिस पिकेट स्थापित की गयी है। हम जांच कर रहे हैं कि गांव के मकानों में आग कैसे लगी और क्या यह घटना टीएमसी नेता की मौत से संबंधित है जो गहरी निजी दुश्मनी के कारण की गई प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि फिलहाल इसकी जांच की जा रही है।
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। उन्होंने टीएमसी पर अपने ही लोगों की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राष्ट्रपति शासन लगाना ही राज्य की रक्षा का एकमात्र तरीका है। वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में स्थिति खराब हो रही है और यहां संविधान का अनुच्छेद 355 लागू किया जाना चाहिए।

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