कोलकाता हिन्दी न्यूज | 31 अगस्त 2026: महज 24 फीट के ढांचे में 45 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक की पूरी व्यवस्था को समेटना सुनने में भले ही असंभव लगे, लेकिन न्यू बैरकपुर के कलाकार अनूप विश्वास ने इसे हकीकत में बदल दिया है।
ट्रैक से लेकर सिग्नल, ब्रिज, ओवरब्रिज, टनल, बिजली आपूर्ति और पावर सेक्शन तक—रेलवे की कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को इस छोटे से मॉडल में बेहद बारीकी से शामिल किया गया है।
खास बात यह है कि यह केवल देखने के लिए बनाया गया कोई सामान्य मॉडल नहीं है। बिजली का कनेक्शन देने के बाद मॉडल के अलग-अलग हिस्से वास्तविक प्रक्रिया के अनुरूप काम भी करेंगे। रेलवे अब इस मॉडल का इस्तेमाल प्रशिक्षण के उद्देश्य से करने जा रहा है।
कांचरापाड़ा रेलवे वर्कशॉप में होगी मॉडल की तैनाती
यह विशेष मॉडल कांचरापाड़ा रेलवे वर्कशॉप के ट्रेनिंग सेंटर के लिए तैयार किया जा रहा है। इसे ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम मॉडल के रूप में विकसित किया गया है।
आमतौर पर रेलवे की विद्युत आपूर्ति और ट्रैक्शन सिस्टम को समझने के लिए प्रशिक्षुओं को कई किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर जाकर अलग-अलग व्यवस्थाओं को देखना पड़ता है।
लेकिन इस मॉडल के जरिए अब इन सभी व्यवस्थाओं को एक ही जगह पर देखकर और समझकर व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया जा सकेगा।
मॉडल में यह दिखाया गया है कि सबस्टेशन से रेलवे ट्रैक तक बिजली किस तरह पहुंचती है। किसी हिस्से में तकनीकी समस्या आने पर संबंधित लाइन को किस तरह बंद किया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर उसे दोबारा कैसे चालू किया जा सकता है, इसकी व्यवस्था भी मॉडल में शामिल की गई है।
33 हजार वोल्ट से 11 हजार वोल्ट तक की प्रक्रिया भी दिखाई गई
मॉडल की सबसे खास विशेषताओं में से एक इसमें शामिल पावर सप्लाई सिस्टम है। इसमें यह प्रदर्शित किया गया है कि 33 हजार वोल्ट की बिजली को किस तरह 11 हजार वोल्ट तक लाकर रेलवे ट्रैक्शन सिस्टम में इस्तेमाल किया जाता है।
इसके लिए मॉडल में पावर स्टेशन और ट्रांसफॉर्मर की व्यवस्था भी बनाई गई है। इससे प्रशिक्षण लेने वाले रेलवे कर्मचारी वास्तविक रेलवे प्रणाली को छोटे पैमाने पर समझ सकेंगे।
ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं को एक साथ प्रदर्शित करने की वजह से यह मॉडल रेलवे प्रशिक्षण के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
दो महीने से अधिक समय से चल रहा था काम
इस मॉडल को तैयार करने में न्यू बैरकपुर के कलाकार अनूप विश्वास और उनकी टीम ने दो महीने से अधिक समय तक मेहनत की है। अनूप अपने वर्कशॉप में सात-आठ लोगों की टीम के साथ इस मॉडल को तैयार कर रहे थे।
काम अब लगभग पूरा हो चुका है। इसके बाद 24 फीट लंबा यह मॉडल कांचरापाड़ा रेलवे वर्कशॉप के ट्रेनिंग सेंटर तक पहुंचाया जाएगा।
मॉडल का ढांचा तैयार होते देखकर स्थानीय लोगों में भी काफी उत्सुकता पैदा हो गई है। लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी छोटी जगह में 45 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक की पूरी व्यवस्था कैसे समा सकती है।
‘यह सामान्य सजावटी मॉडल नहीं, इंजीनियरिंग स्केल मॉडल है’
मॉडल तैयार करने वाले कलाकार अनूप विश्वास ने बताया कि यह किसी प्रदर्शनी के लिए बनाया गया सामान्य सजावटी मॉडल नहीं है, बल्कि रेलवे के प्रशिक्षण के लिए तैयार किया गया इंजीनियरिंग स्केल मॉडल है।
उनके मुताबिक, 45 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक को एक निर्धारित अनुपात यानी स्केल के आधार पर 24 फीट के ढांचे में प्रस्तुत किया गया है। मॉडल में शामिल प्रत्येक चीज को तय माप के अनुसार तैयार किया गया है।
अनूप विश्वास के अनुसार, मॉडल में 33 हजार वोल्ट की बिजली को 11 हजार वोल्ट तक लाने की प्रक्रिया, पावर स्टेशन और ट्रांसफॉर्मर समेत ट्रैक्शन सिस्टम से जुड़ी कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को दिखाया गया है।
वाटरप्रूफ मॉडल, तीन साल की वारंटी
इस मॉडल की एक और खासियत यह है कि इसे पूरी तरह वाटरप्रूफ बनाया गया है। इसके साथ तीन साल की वारंटी भी दी गई है।
करीब दो महीने से अधिक समय तक चले निर्माण कार्य के बाद अब यह मॉडल रेलवे प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचने के लिए तैयार है। वहां इसका इस्तेमाल प्रशिक्षणार्थियों को रेलवे के ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन और बिजली आपूर्ति प्रणाली को व्यावहारिक तरीके से समझाने में किया जाएगा।
इस तरह 24 फीट के इस छोटे से मॉडल में 45 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक की तकनीकी दुनिया को समेटने का अनोखा प्रयास न सिर्फ कला और इंजीनियरिंग का बेहतरीन मेल है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों के प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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