कोलकाता हिन्दी न्यूज | 31 जुलाई 2026: तृणमूल कांग्रेस की 21 जुलाई की शहीद सभा को लेकर दाखिल मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट से अदालत संतुष्ट नहीं हुई।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सभा में समर्थकों की संख्या सीमित रखने के निर्देश के बावजूद उसका पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
इस पर नाराजगी जताते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि भविष्य में अदालत के निर्देशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
21 जुलाई की सभा को लेकर हाई कोर्ट में क्या हुआ?
शुक्रवार को 21 जुलाई की सभा की अनुमति से जुड़े मामले में राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने राज्य से पूछा कि सभा के दौरान किसी तरह की अप्रिय घटना या अशांति हुई थी या नहीं।
इसके जवाब में कालीघाट तृणमूल की ओर से डेरेक ओ’ब्रायन के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 21 जुलाई की सभा के दौरान कोई अशांति नहीं हुई और पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
हालांकि, राज्य सरकार की रिपोर्ट में अदालत के पूर्व निर्देशों के पालन को लेकर कुछ गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं।
निर्देश का नहीं हुआ पालन?
राज्य के महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सभा के दौरान पर्याप्त पुलिस सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, अदालत की ओर से समर्थकों की संख्या को लेकर जो सीमा तय की गई थी, उसका पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
राज्य की ओर से दावा किया गया कि भीड़ बढ़ने के कारण कैथेड्रल रोड के दोनों ओर का रास्ता अवरुद्ध हो गया, जबकि निर्देश के मुताबिक कम से कम एक तरफ का रास्ता खुला रखा जाना था।
राज्य के इस पक्ष के बाद अदालत ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि यदि अदालत के निर्देश दिए गए थे तो उनका पालन किया जाना चाहिए था।
भविष्य में निर्देश तोड़ा तो होगी कार्रवाई
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने स्पष्ट चेतावनी दी कि भविष्य में अदालत के आदेशों की अवहेलना को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि अदालत के निर्देशों का उल्लंघन दोबारा होता है तो आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
हाई कोर्ट की यह टिप्पणी 21 जुलाई की सभा से जुड़े मामले में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि सभा के लिए पहले से ही भीड़ और यातायात व्यवस्था को लेकर कई शर्तें निर्धारित की गई थीं।
पहली बार बदला 21 जुलाई सभा का स्थान
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन से पहले तृणमूल कांग्रेस की 21 जुलाई की सभा आमतौर पर धर्मतला क्षेत्र में आयोजित होती रही थी। सभा को लेकर पहले भी यातायात और भीड़ प्रबंधन से संबंधित सवाल उठते रहे हैं।
इस बार राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद 21 जुलाई का कार्यक्रम बिड़ला तारामंडल के सामने आयोजित किया गया। राज्य सरकार की ओर से दाखिल रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस बार भी अदालत द्वारा निर्धारित कुछ शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ।
अब हाई कोर्ट की चेतावनी के बाद आगामी राजनीतिक सभाओं में अदालत के निर्देशों और प्रशासन द्वारा तय शर्तों का पालन किस तरह कराया जाता है, इस पर नजर रहेगी।
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