खड़गपुर। रेलवे केटरिंग वेंडर्स की लगभग 18 वर्षों से चली आ रही लंबी और कठिन लड़ाई आखिरकार निर्णायक मुकाम पर पहुंच गई है। हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में संबंधित केटरिंग कंपनी को आदेश दिया है कि वह 172 रेलवे केटरिंग वेंडर्स को चार-चार लाख रुपये की बकाया सैलरी ब्याज सहित भुगतान करे। इस निर्णय को श्रमिक अधिकारों के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
फैसले की सूचना मिलते ही खड़गपुर समेत पूरे रेल मंडल क्षेत्र में खुशी का माहौल बन गया। वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे कई बुजुर्ग वेंडर्स की आंखें नम हो गईं। एक-दूसरे को गले लगाकर उन्होंने अपने संघर्ष और धैर्य की जीत का जश्न मनाया। यह दृश्य एकजुटता और निरंतर संघर्ष की सशक्त मिसाल बन गया।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद खड़गपुर में INTUC नेता अरविंद पांडेय के आवास पर उत्सव का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में वेंडर्स और समर्थक वहां एकत्र हुए।

ढोल-नगाड़ों की गूंज, मिठाइयों का वितरण और जीत के नारों के बीच माहौल पूरी तरह उत्साहपूर्ण नजर आया। वेंडर्स ने इस आंदोलन में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए अरविंद पांडेय के प्रति आभार व्यक्त किया।
मौके पर अरविंद पांडेय ने कहा कि यह फैसला केवल 172 वेंडर्स की जीत नहीं, बल्कि पूरे रेलवे केटरिंग सेक्टर में काम कर रहे मजदूरों के अधिकारों की जीत है।
उन्होंने कहा कि 18 वर्षों का संघर्ष आसान नहीं था, लेकिन न्याय के रास्ते पर डटे रहने का यही परिणाम है। यह फैसला उन तमाम मेहनतकश मजदूरों के लिए उम्मीद और हौसले का संदेश है, जो वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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