कोलकाता | 18 दिसंबर 2025 : पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां एक बाघिन की मौत हो गई है।
हैरानी की बात यह है कि पिछले तीन महीनों में यह तीसरी बाघिन की मौत है, जिससे चिड़ियाघर की स्वास्थ्य और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पोस्टमार्टम के बाद भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं
जानकारी के मुताबिक, बाघिन को रात मृत अवस्था में पाया गया था। इसके बाद अलीपुर पशु अस्पताल में उसका पोस्टमार्टम किया गया। हालांकि, मौत का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।

विसरा के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
अलीपुर चिड़ियाघर के निदेशक ने बताया कि सभी प्रक्रियाएं तय नियमों के अनुसार पूरी की गई हैं और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों पर स्पष्ट टिप्पणी की जा सकेगी।
शरीर में मिले परजीवी
वन भवन सूत्रों के अनुसार, मृत बाघिन के शरीर में परजीवी (Parasites) पाए गए हैं। हालांकि, पशु विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परजीवी संक्रमण के कारण इतनी कम उम्र में मौत होना असामान्य है। उनका कहना है कि समय पर इलाज और निगरानी से ऐसे मामलों में जान बचाई जा सकती है।
इसी वजह से अब चिड़ियाघर में जानवरों की स्वास्थ्य निगरानी, इलाज और देखभाल प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
कम उम्र में मौत ने बढ़ाई चिंता
मृत बाघिन की उम्र लगभग 2 साल 10 महीने बताई जा रही है। उसे अगस्त 2024 में ओडिशा के नंदनकानन चिड़ियाघर से अलीपुर लाया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उम्र रॉयल बंगाल टाइगर के विकास का महत्वपूर्ण चरण होती है। इस दौरान मौत होना बेहद गंभीर और असामान्य माना जा रहा है।
विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता
वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरण संगठनों ने अलीपुर चिड़ियाघर में लगातार हो रही बाघिनों की मौत पर गहरी चिंता जताई है। नेचर एनवायरनमेंट एंड वाइल्ड लाइफ सोसाइटी के सचिव विश्वजीत रायचौधरी ने कहा कि जब तक पोस्टमार्टम और विसरा रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी।
उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि चिड़ियाघर में रखे गए बाघों और अन्य वन्यजीवों की नियमित और विस्तृत स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की जाए। रायचौधरी के अनुसार,
“कैंसर को छोड़ दिया जाए, तो अधिकांश बीमारियों का समय पर इलाज संभव है। यदि बीमारी की पहचान पहले हो जाती, तो शायद इस बाघिन की जान बचाई जा सकती थी।”
विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ ही महीनों के भीतर तीन बाघिनों की मौत महज़ संयोग नहीं हो सकती। इससे अलीपुर चिड़ियाघर की मेडिकल मॉनिटरिंग, पोषण व्यवस्था और पशु देखभाल प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
पहले भी हो चुकी हैं दो मौतें
गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर 2025 में 24 घंटे के भीतर दो बाघिनों की मौत हो गई थी। उस समय अधिकारियों ने मौत का कारण बुढ़ापा बताया था। लेकिन अब एक युवा बाघिन की मौत ने पहले दिए गए स्पष्टीकरणों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद वन विभाग, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और आम लोगों की ओर से स्वतंत्र जांच और बेहतर निगरानी व्यवस्था की मांग तेज हो गई है।
फिलहाल, वन विभाग और चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से अंतिम रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है। पोस्टमार्टम और विसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इतनी कम उम्र में बाघिन की मौत के पीछे बीमारी, लापरवाही या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था।
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